Tuesday, September 28, 2010

Maine pyaar kiya Hai......

People are sometimes very thoughtful when they are falling in love. They think a lot of things. Some people even say that they are not in love. They feel that they are just having a wild emotion which is going to die down soon. My poem below explores the feelings of a person who was sometime back in love but never realized. Now retrospective about such a feeling he realizes that it was love and also feels that there was some love on the other side as well.



बहाने बनाके कब किसीने
अपनी मोहब्बत का इज़हार नहीं किया है
इशारो इशारो में यूँ ही कब
किसी अजनबी को इश्क का इकरार नहीं किया है?
बताओं तो सही इस जहाँ में कब
किसीने प्यार नहीं किया है ..........

किताबों के किनोरों से कभी
यूँ ही हुस्न का दीदार किया है ,
उस हुस्न ने भी खुद को देख कर आईने में ,
गुलाबी गालों पर मुस्कराहट निसार किया है |
कहते है बुत जिसे.....उस बुत ने भी कभी
किसी न किसी से प्यार किया है ...........

फोन के किनारे बैठ कर मैंने
घंटो तेरे रिंग का इंतज़ार किया है ,
मासूम सी चाहत .....ठंडी आहों ने फिर
हलके से मेरे दिल पे वार किया है |
तेरे इंतज़ार में वक़्त यूँ काट कर मैंने
तेरी रूह से भी प्यार किया है ..........

आज कभी जब सोचता मैं हूँ
तो न जाने क्यों मुझे अजीब ख्याल आते हैं
मेरी उन इश्क के दास्तानों पर
मेरे हर एक लम्हे सवाल उठाते हैं
जानता मैं हूँ की मैंने कभी वक़्त अपना बेकार किया है
पर क्या करता मैं.....की मैंने भी तुमसे प्यार किया हैं.......

कुछ लोग होते ऐसे है जो
नहीं रखते है कभी वक़्त का लिहाज़,
वक़्त अपनी चलता है चाल पर
बदल न पाटा है उनके मिज़ाज |
मेरे हर मिज़ाज में तुम्हारे ख्यालों का कतार हुआ है
या रब मैं क्या करूँ.....जो मुझे तुमसे प्यार हुआ है |

साँसों में रंग नहीं होते पर
लगता हैं सांसें मेरी रंगीन है
वैद - हकीम भी कहते है की
दिल का ये मामला संगीन है
पलकें जप्कायीं मैंने उसके पहले ही तेरे नज़रों का वार हुआ न
फिर तुम ही बताओं मुझे येही तो प्यार हुआ न ?

सितारों में ढूँढता तुझे मैं हूँ
पागल हवाओं में मैं देखता तेरा निशाँ हूँ
क्या करून जो न तू हो मेरे पास
तो लगता मैं कुछ परेशान हूँ |
हाथों की लकीरों ने अक्सर मुझसे धोखा बार बार किया है
घबराता मैं किस्मत से हूँ ....जब मैंने तुमसे प्यार किया है .....

तुम भी तो कभी मेरा नाम लेती होगी
तुम्हारी साँसे कभी तो मेरी आह भरते होंगे
तुम्हारी यह आँखें कभी न कभी तो
मेरे प्यार में खुदा से दुआ करते होंगे ?
कहीं न कहीं मेरे प्यार ने इश्क को तेरा यार किया है
तुने भी आखिर मुझसे ...मेरी तरह .... प्यार किया है .......

So when you feel such wild things are happening with you, think that this is love.

Take Care,

Kalyan

Tuesday, September 21, 2010

Jab maine tumse pyaar kiya ..... ( When I loved you )

There are instances when you might have fallen in love and then realised that the decision was only one-sided. You might feel that you made a mistake but then would like to recollect those memories as a sweet dream. My poem below is actually speaking about the nostalgia that is involved in your later life when you recollect those memories. Sometimes you laugh and sometimes you regret.



दिन में मैंने गिने तारे
रात को सूरज का दीदार किया ,
होश खोये मैंने इस तरह
की होश में आने से इनकार किया
क्या नहीं किया जब मैंने तुमसे प्यार किया ........

कहते है लोग की कभी कभी
पत्थर भी बोल पड़ते हैं ,
चींटी में अगर हो हौसला फिर
चींटी भी पहाड़ चढते है ;
ऊंचा उड़ा मैं ; फिर उंचाई से इनकार किया
दिखा मैं बौना जब मैंने तुमसे प्यार किया ......

तकते तकते कभी रह तुम्हारी
मैंने बदलते देखा दिन को शाम में ,
तुम्हारे इज़हार का किया इंतज़ार मैंने
तुम्हारे भेजे हर पैघाम में |
कभी चिठ्ठी तो कभी तेरी आहट ने बेकरार किया
वक़्त भी कुछ हुआ बेरहम. जब मैंने तुमसे प्यार किया ......

ज़माना ख़राब है मगर
यह ज़माना आज भी हुस्न का कायल है ,
दिल मेरा लाख आवारा सही
पर आज तेरे प्यार में घायल है |
कभी रफ़ी के गाने तो कभी जगजीत को अपना यार किया
इंसान से शायर बना जब मैंने तुमसे प्यार किया ........

कोलेज के खाली वक़्त में
तुम्हे देखना चोरी चोरी
समझना की कहीं न कहीं बंधी है
मेरे साथ तुम्हारी डोरी
अपने साँसों पर मैंने तेरे खयालो का वार किया
दुश्मन खुदका बना कहीं जब मैं तुमसे प्यार किया ......

आँखें जब तुम्हारे कभी पलकें झपकाती थी
रोकता मैं खुदको अपने पलक झपकाने से
की कहीं रह न जाए नज़रों से परे वो नज़ारा
जब देखू मैं तुम्हे कुछ बहाने से
खुदसे खेली आँख मिचोली और खुदको ही बेज़ार किया
हुई मेरी खूब खिचाई जब मैंने तुमसे प्यार किया ........

सोचता जब मैं हूँ आज
तो खुद पर ज़रा मैं हस लेता हूँ ,
बंधन जो छूट गया हैं कहीं
उस बंधन को मैं कस लेता हूँ
माजी ने मेरा कभी कभी जीना दुश्वार किया
फिर कभी सोचता हूँ मैं की क्यूँ मैंने प्यार किया .........


Take Care

Kalyan.

Saturday, September 18, 2010

Teree Muskaan ....... (Your Smile........)

A smile can mean a lot. It can be a notation of joy, it can hide sorrows, it can be just a facade or it can be a symbol of deceit. Smile has many faces. I have tried to describe some of the aspects of a smile. The poem of mine describes smile and its many interpretations.



गोरे गोरे गाल पे आज
कुछ लाली सी छाई है ,
यह किस बात पर न जाने
तू यूँ शरमाई है ,
मौसम बहारों का तो आया नहीं है,
फिर तुने होंठों की कलियाँ क्यों खिलाई है?
बेरंग मौसम में जो ले आयी है जान,
कुछ और नहीं है , वोह है तेरी मुस्कान .......

जब हवा ने किया था इशारा
तेरे मेरी ज़िंदगी में आने का ,
गमो ने मेरे झिझक से
रुख किया बहार जाने का
इस तरह तेरा बनना मेरे दिल का मेहमान ,
मीठा सा एहसास, तेरी वोह मुस्कान .......

आँखों की वो पलक जो
छुपके इकरार करते हैं ,
दिल की वोह धड़कने जो
मेरे दिल से प्यार करते है ,
उन धडकनों के शोर से झूमते मेरे कान
प्यार में बेहेकना यु और तेरी वो मुस्कान .....

कौन कहता है की आज भी मुजस्समे बनते नहीं
ज़रा आके देखे आज कुदरत के कमाल को ,
तेरे नैनों के तीर ने यूँ कर दिया है घायल
की अब मिलते है जवाब हर एक सवाल को |
होठों के नीचे जो वो छोटा सा तिल है,
वो बढाती है तेरे हुस्न की शान ,
वो तिल अनमोल बनता है .....जब भी देखू तेरी मुस्कान .......

जब तू कभी मुझे पुकारती है
तो लगता है की जन्नत से बुलावा आया है ,
मुझे मुझसे ही दूर करने
न जाने कहाँ से ये छलावा आया है |
छलावो में यूँ हौले हौले मेरे फस रही है जान ,
क़त्ल होता हूँ मैं ....और तू देती है मुस्कान ......

यह होठो की हरक़त हर वक़्त मासूम नहीं होती,
कभी कभी इसमें क़त्ल के इरादे भी होते है
जो दिल को तो लुभाते है और मन भी बहलाते है
लफ़्ज़ों में कभी कभी वो झूठे वादे भी होते है
दिल को जीतना पहले और फिर छुपके लेना जान
जान लेवा भी हो सकती है कभी कभी मुस्कान ......

दुनिया में जब न थे चाँद सितारे
जब पूरा जहाँ वीरान सा था ,
शायद तुम्हारे हँसी देख कर
खुदा भी कुछ हैरान सा था
तुम्हारी हर अदा में डूबा हर एक इंसान
खुदा की खुदाई भी है तुम्हारी मुस्कान ........

ज़िंदगी की नाव जब मेरी
डोलती हो यूँ मजधार में
तुम होती हो मेरे पास
मेरी हर जीत में हर हार में
नाज़ुक से तुम्हारी काया पर ताक़त का निशाँ
सच है वो तुम हो ...और है तुम्हारी मुस्कान .......

अब मुझे लगा पता की क्यूँ तुम्हे बनके खुदा भी था हैरान
शायद सोचा नहीं था उसने की क्यों हैं ये मुस्कान ?
खैर छोडो ये बातें रूहानी, ये बातें भी करतें हैं परेशान
ज़माना तो दीवाना है देख कर तुम्हारी मुस्कान .......

मुझे तो लुभाते है हर तरीके तेरे.....
तेरी हर अदा पर है मेरा रुझान
पाया है जन्नत यहीं मैंने ......जब पाया है मैंने तेरी मुस्कान ......


A smile can really mean a lot of things.......

Love,

Kalyan

Thursday, September 16, 2010

Intezaar ki aadat (When waiting becomes a habit)

There are instances when we see people wait a lot for their beloved. Our thought process may indicate the fact that these people are actually giving too much weight age to a cause that is very trivial. They might be just overwhelmed by a slight response of love that may have come their way. However, what eyes see and what minds interpret are not always the truth. There are some people who really love to wait, especially when it comes to waiting for the beloved. For them waiting is a habit; and it really gives them a good high when they wait for the beloved. The poem written by me below is actually depicting the emotion of such people who love to wait in love.




इंतज़ार में तुम्हारे मैंने आखों को खुला रखा
के दिल को है ऐतबार की होगा तुम्हारा आना;
जन्नत से बुलावा जो मेरा आया तब मैंने
यूँही टाल दिया मेरा जन्नत में जाना |

कहते है कुछ पागल की आज दिन है मिलने का
पर लगता है की अभी भी कुछ और दिन बाकी है,
महखाने में ताला लगा है जबसे तेरे आँखों से पिया मैंने,
हर मधुशाला में बेकार बैठा साकी है |

तुम आओगी इस उम्मीद पर मैंने
अभी भी बचा राखी है मेरी कुछ साँसे ;
एहसास कहीं यूँही कुचल न जाये वक़्त के पाव तले
तभी मैंने दबाके राखी है बहुत से एहसासे |

कभी खिड़की के पास तो कभी दरवाज़े पर
टिकाके रखता हूँ मैं हर ओर नज़र ;
शायद किसी आहट में मिले तेरा संदेसा
कभी तो हो इस रात की सेहर |

कई साल महीने यूँही शायद बीत गए
पर इंतज़ार तुम्हारा मेरा नहीं हुआ पूरा
ज़िंदगी की शाम में बैठा सोच रहा हूँ
की कहीं ये ज़िंदगी तुम्हारे बिना है अधूरा |

आज भी सुबह - सुबह पारिजात के फूल खिलते है
आज भी ओस गिरते है हरे हरे घास पर ;
तुम्हारा न होना फिर क्यों इतना खलता है मुझे
क्यों करती हो आज भी राज तुम मेरी हर सांस पर?

तुम मेरे साँसों में बसी हो,
नहीं हो तुम कोई बारह या चौदा का पहाड़ा ;
भुलाऊं तुम्हे तो कैसे भुलाऊँ
कैसे मारू अपने पाव पर कुल्हाड़ा ?

दीदार फिर से तेरा गर नसीब में नहीं है,
तो फिर तेरा इंतज़ार ही सही |
ये बेरुखी तेरे तरफ से जो है सो है ,
उस बेरुखी के एवज में मेरा प्यार ही सही .......

मेरा प्यार तेरे लिए पैघाम है ख़ुशी का
नहीं हैं ये कोई ग़म का इशारा,
डूबते कश्ती का मैं कोई मुसाफिर नहीं हूँ
जिसे चाहिए हो तिनके का सहारा |

करता हूँ इंतज़ार क्योंकि तेरी राह तकना अच्छा लगता है ,
तेरे मासूम जिद्द के आगे कभी कभी झुकना अच्छा लगता है |


Love,

Kalyan

Miley jo tum....... ( When I met you!!!!)

Viraah, a word that has a lot of repercussion in the phase of love. Love is actually a non existent entity without any kind of pain, and the pain is even stringent and stinging if it is that of being away from your beloved. A euphoria transcends over the parchy surface of heated emotions when you see the first glimpse of your beloved after a long long time. This feeling is really unparalleled and unexplainable. The poem of mine (which I am writing after a long time) actually explores these emotions.



गीली हावाएं आज मन को नम करती हैं,
लगता है रब भी कहीं आंसूं बरसा रहा है ,
तुझे देखने के लिए......बस युही दो पल कहीं,
पानी भी सावन को तरसा रहा है |

आँखों के इंतज़ार का आज आखरी पल होगा,
जब वे देखेंगे तुम्हारी एक झलक ;
रूमानी यूँ हो जाएगा हर मंज़र बंजर सा ,
गीली पलकों से नहीं मिलेंगे पलक |

चाँद सा मुखड़ा जब तुम्हारा
बरसायेगी नज़रों की चांदनी
दिल में कड़केगी बिजली मेरे
साँसों में होगी सनसनी |

फ़िज़ूल कुछ बहाने बनाके मैं
आ जाऊँगा तुम्हारे कुछ करीब ;
धड़कन धड़कन तुम्हे पुकारेगी
बन जाओगी तुम मेरा नसीब |

तुम्हारी मस्रूफ़िअत को मैं कुछ
मेरे मिलने का बनाऊंगा बहाना ;
तुम कहीं तुम्हारे वक़्त में उल्झोगी
मेरा तो यूँही होगा दिल-बहलाना |

तुम्हारे कानो में मैं घोलूँगा
प्यार का वो मीठा शहद ;
मिटेंगी जिससे सारी दूरियां
खुल जायेंगे हर सरहद |

सारे सूनेपन तोडके जब
मिलता मुझे तुम्हारा साथ है;
लगता है कुछ ऐसा जैसे
मिलने में खुदा का हाथ है |

शाम का आँचल ओढ़ता है
दिल मेरा जो बेताब है
प्यार की ठंडक....हुस्न की रोनक
जिन्दंगी के हसीं हिसाब है |

तुम मिलती हो तो मुझे आज
वक़्त की कुछ कमी सी है
सूखे सूखे अरमान जो थे
इनमे आज कुछ नमी सी है |

झिलमिल झिलमिल रौशनी में
जब दीखता है तुम्हारा चेहरा ;
कानो में तब आती है आवाज़ सिर्फ तुम्हारी
होता हूँ मैं बाकि जहाँ से बेहरा |

मिले तुम तो मुझे कुछ सूकून सा है
सोये अरमानो में आज कुछ जूनून सा है,
पल पल इंतज़ार का आज होगा खात्मा
प्यार में नहायेगी मेरी भटकती आत्मा |

पागल से बादल आज कुछ
खुशी के आंसूं बरसाते है
कुछ लोग इन्हें कहते है बारिश
जो सावन में भी तरसाते है |

मिलना हमारा हुआ यूँ की
जहाँ कुछ डोला अपने कदमो पर
खुशी के कुछ तराने बजे
खामोश ग़मगीन सदमो पर |

गर्म साँसे.....ठंडी आहे
जुल्फों का वो ताना - बाना
लुभाते मुझे हर अदा तुम्हारी
हर ज़र्रा तुम्हारा है एक फ़साना |

मिली जो तुम आज तो फिर करो वादा
मुझसे तुम दूर न जाओगी
मेरे दिल को बनके वीरान अब
कभी अपना जहाँ न सजाओगी |

Meeting after long days of seperation is really cool.

Love,

Kalyan

Friday, September 10, 2010

Bataa do mujhe....Tumhe Pyaar nahin

Distances sometimes can burn out the candle of love. So much so that there is a kind of feeling that there is no love existing. Distances, lead to a lot of conflicts and then finally there is this question, "Tell me do you love me or not???" The poem below actually delves into this reality of love, very cruel but very true.





तेरी हर अदा को मैं करता हूँ याद
दूर हूँ तुझसे पर मेरी हर सांस
निकलती है मेरे बदन से
तेरा नाम लेने के बाद .............
इन हवाओं में कहीं तुम्हारा निशान तो है
खो गया जो कहीं, मेरा जहाँ तो है
तुमसे यूँही कभी मैं जो करू बातें
धीरे धीरे से बीत जाएँ मेरी हर रातें

तुम नहीं हो मेरे पास पर
खुशबू तुम्हारे साँसों की है,
ओस की वो बूँदें सुख गयी है पर
नमी आज भी एहसासों की है|
दिल, धड़कन, जान ये सब कहीं
आज बातें पुरानी लगती है
वो इश्क जो था पुरजोर कभी,
आज एक भूली कहानी लगती हैं |

अरसा सा बीत गया देख के
तुम्हारे होंठों पर वो मीठी मुस्कान |
सूखे से बागीचे में आज
वीरान सा कुछ है बागबान |
होंठों के नीचे वो तिल जो है
आज कुछ धुंधला सा हुआ यादों में,
मेरे दिल के किसी कोने में
कहीं ज़िक्र तो तेरा आया कुछ वादों में |

सकपकाती बिजली जब गिरती है कहीं गाँव में
अँधेरा भी जब कभी ढूंढता बसेरा छाओं में ,
तब कभी मेरी याद तुम्हे थोडा तो सतायेंगे,
तुम्हारे खुशाली में भी वो कुछ तो तुम्हे रुलाएंगे|
पर मैं चाहता हूँ बस एक झलक मुस्कान की
गिरवी जो है तुम्हारे पास.....खैर चाहता हूँ उस जान की |
जलाती तुम हो....बुझाती तुम हो....फीर आज क्योँ हो खामोश,
तुम्हारी ये चुप्पी भी शायद मुझे कर देगी बेहोश |

बरसात की वो दो बूँदें जो गिरी थी तेरे गालों पर
बूँदें जो गिरे बनके जवाब मेरे हर सवालों पर
वो सवाल आज मैं फिर से तुमसे रहा हूँ पूछ
इस दो-राहे में मैं आज भी रहा हूँ जूज
मुझे तुम बता दो की तुम्हे मुझसे प्यार नहीं
मेरे जान के सड़के का भी तुम्हे एतबार नहीं
एक बार कहदो की आँखे तुम्हारी सच करती नहीं बयां
इन आँखों में दूर दूर तक नहीं मेरा कोई निशाँ

Why to go so far from someone, that such questions crop up. So stay close, and stay clear.

Kalyan

intezaar banee qayamat

Waiting for the beloved is sometimes a very tedious task. Sometimes the wait itself is so lethal that it may give rise to a lot of emotions which may end up killing the love that is actually nurtured with great care. The poem that I have written is describing the same feeling. In this the wait is a fatal blow to the love.



थिरकते पैरो को आज
किसका इंतज़ार है ?
आँखों के झरोखे तो बंध है
पर दिल कहीं बेक़रार है |
की सपनो में वो है कहीं पर
सामने वो आते नहीं ;
खयालो में ऐसा कब्ज़ा बनाया,
की खयालो से वो जाते नहीं |

ठंडी सी आह कहीं दिल में आग लगाती है ,
प्यार की ठंडक ही इस आग को बुझाती है |
पूनम का जो चाँद है वो आज बादलों में शर्माता है
चांदनी में कहीं आज दिल को नहीं लुभाता है |
कौनसी वो कशिश है जो मुझे खींचती है तेरी ओर
दिखती हैं तू ही तू ......सांझ हो या भोर |

पागल सी धुप आग बरसाती है कहीं
भादों का मौसम जो आ गया
नहीं रुकती मेरे दिल की धडकने
मिलने का तुझसे पैघाम आ गया |
सुना था की प्यार कहीं छुपता नहीं
पर मेरा प्यार तुझे नज़र न आया
दिन से रात मिली, वक़्त से रफ़्तार
पर हमारे मिलने का मंज़र न आया |

सुलगती सांसे है तो कहीं है ठंडी आंहे
इंतज़ार में तुम्हारे खुली है मेरी बाँहें,
तड़प तड़प के मैंने गुज़ारे है कई रातें ,
सपने मेरे सुनते है मुझे तुम्हारी बातें |
दीवाना मैं था नहीं पर लगता ये दीवानगी है
धड़कन तो बंध गए पर दिल में आवारगी है |
सुन्न होते एहसासों को मेरे क्यों है तुम्हारी तलाश
मेरे दिल को ही देता है धोका ये मेरा दिल बदमाश |

अब मुझसे देखा नहीं जाता और तुम्हारी राह
थकते थकते कहीं मिट न जाए इस दिल में तुम्हारे चाह|


Don't make him wait longer, probably then he may not need to wait for you.

Love,

Kalyan

Saturday, September 4, 2010

Dil toota hai......phir bhi hai muskaan(Heart has broken still thee is smile)

When a heart breaks it is a very bad situation. However, this is a story of a person whose heart broke but then she managed to cover every pain and every grievance well covered under her smile.



कच्ची घास पर ओस की कुछ बूँदें
इस तरह से सतह को सहलाते हैं
जैसे तेरे आँखों के आंसूं कभी कभी
तेरे टूटे दिल को बहलाते है |
दिल टूटने की आवाज़ जो कहीं कोई सुन पाता
क्या पता फिर ये सावन भी शायद जाते जाते रुक जाता |

दिल लगाया जो तुने उस बेदर्द के साथ
तो शायद जो हुआ वो अच्छा हुआ |
तेरे दिल के टूटे किनारों में कही
झूठे वादों का खुलासा सच्चा हुआ |
प्यार की बाज़ी हार कर भी कहीं मुझे तू लगती है फतेहबान
खुदा कहीं अगर देख रहा हो तो आज बना तेरा निगेहबान |

सर्द साँसों में तेरे कहीं ठंडी सी आह छुपी है
जुदा होते राहों में आज मिलने की राह छुपी है ,
सन्नाटो के भवर में आज तू जब देती है कही आवाज़
गूंजती है हर बात तेरी ....बोलते है हर अलफ़ाज़
क्यों मुझे तुम छोड़ गए .....क्यूँ मेरा दिल तोडा तुमने
करके मुझसे कई वादे क्यूँ हर वादों से मुह मोड़ा तुमने?

बिखरी जो तेरी जुल्फें है
बुनती हैं ये विरह का ताना बाना
ढूंढती आँखें आज भी कहती है ,
लौट आओ तुम,,,,यूँ न जाना!
धड़कन धड़कन सुनाती है आज कहानी बे वफाई का
थोड़ी सी भी मुस्कान कहीं इशारा है जग-हसाई का |

पल पल बहता आँखों से नीर आज
सौ समंदर का ले आयी है सैलाब
बातें तुम्हारी अब वो सवाल बने है
जो ढूँढ़ते रहते हर पल जवाब |
फिर भी कहीं तुम देती हो तुम्हारे खैरियत की तक़रीर
मुस्कान अभी भी हैं उन होंठों पर ....जब बिखरी सी है तस्वीर |

May God bestow everybody the kind of strength that she has.

Kalyan

Monday, August 30, 2010

Shakkar se meethi tu.... (You are sweeter than sugar)

"Love" brings about a gamut of emotions that make you ponder over lot of things. One such things that make you speechless is to describe the beauty of your beloved. Beauty as they say is more beautiful as it is gift wrapped in love. The poem that I am penning down is one of the instances where you lose words describing beauty of your beloved.



इस तरह दिल में दर्द उठा है
की जैसे आज बरसात रो पड़ेगी
खलिश कोई है यु तेरे बिना
की तन्हाई भी चादर ओड़ सो पड़ेगी

तेरे बिना मै तारों को देखता नहीं हूँ,
तारों से मुझे तेरी आँखें याद आती है
तेरे बिना जैसे कहीं ....सूरज की किरने
अंधेरो का फ़रियाद कर जाती है |

क्या कुछ नहीं है दुनिया में
पर आँखों को मेरे क्यूँ तेरा इंतज़ार है ;
प्यार जो अभी भी है एक तरफ़ा
उस प्यार पे अभी भी एतबार है |

शेहेर में एक अफवा सी है
के शायद तुम्हे मुझसे प्यार नहीं
मेरा प्यार जग-ज़ाहिर नहीं है
उस बात से मुझे इनकार नहीं |
मेरा प्यार एक एहसास है दिल का
नहीं है ये कोई कदा इम्तेहान ;
तुम्हारे संग जिऊँगा सातों जनम है यह वादा
फिर क्यों दूं मैं तुम्हारे प्यार में जान ?

संभाल के रखा है अभी भी मैंने
वो रेशमी रुमाल तुम्हारा ......
इंतज़ार मुझे सिर्फ है उस पल का
जब आएगा वो साल दुबारा
जिस साल सोचा था यु मैंने
की तुम्हे मैं दूंगा अपना दिल
तुम्हारे साथ मैं जिया तो फिर
ज़िन्गागी भी लगेगी एक महफ़िल .....

तुम्हारी याद आते ही क्यूँ
आसमान भी कुछ नम सा हो जाता है
ठिठुरती ठंडक हो या कडकडाती धुप
दिल में सावन का मौसम सा हो जाता है |
देखते ही तुम्हे मेरी धड़कने
बिजली सी गिराती है मेरे सीने में
क्या कहूं मैं तुमसे मेरे महबूब
तुम्हारे बिना मज़ा नहीं है जीने में |

वो जुल्फें तुम्हारी जब लहराती है
दिल में मेरे हवा सी चलती है
हाथों के नाख़ून जब तुम्हारे दाँतों टेल आते है
तुम्हारे सोच में मेरी पुरी दुनिया घुलती है |
पलकों का झपकना तुम्हारा
दाँतों टेल होठों को दबाना .......
रहने देता नहीं मुझे मेरी दुनिया में
कर देता है मुझे कहीं और रवाना .....

कोफी के कुछ काली बूँदें
जब कभी तुम्हारे होठों पर घर बनाते है
गोरे से मुखड़े पर तुम्हारे वो बूँदें
काली घटाओ का राग सुनाते हैं |
नशा तुममे इतना है की पीना मेरा छूट गया
साकी, महखाना अब देखे राहें मेरी
नशीला शाम भी आखिर रूठ गया |

अजीब मुझे लगता है जब
मिठाई तुम कोई खाती हो ......
चाशनी तो तुम खुद ही हो , फिर
अपने - उसमे कैसे फर्क कर पाती हो ?
शक्कर , शहद .....सब एक तरफ है
एक तरफ है वो मुस्कान तुम्हारी
वो आँखें जो कहती बहुत है न कहके
वो आँखें हैं पहचान तुम्हारी |

और कहूं क्या मैं, अलफ़ाज़ मुझे मिलते नहीं
गाना चाहता हूँ मैं .....पर तेरे ख्याल जितने मीठे
साज़ मुझे मिलते नहीं |

Go on appreciate her .....and find more words.

Love,

Kalyan

Saturday, August 28, 2010

Tumhaara aana....mere dil me yu (Your arrival in my heart)

Somebody's arrival in your heart may result in lot of change in you. Love brings with itself its own season and its own weather, which is unique and distinct for different persons. This poem of mine talks about the wetting of a parched heart with the incumbency of a monsoon called "love". For a person, who is totally devoid of this, love may look like an oasis within a huge network of sand-dunes.



मौसम आज कुछ रंग सा बदल रहा है
गा रहा है वो कुछ नए तराने ;
इश्क के नगमे यु गुनगुनाता है दिल
बनाता है तुमसे मिलने के नए बहाने |

ज़माने का दस्तूर मैं
तुम्हारे लिए कुछ भूल सा गया हूँ ...
जुल्फों की तुम्हारे घने छो में
मैं आज कुछ झूल सा गया हूँ..
अजनबी लोग भी मुझे आज अपने से लगते है
तुम्हारे इशारे भी मुझे कुछ सपने से लगते है .....

दिल लगाना तुमसे
मेरे लिए एक जूनून सा बन गया है....
मेरे दिल के आवारा गलियों में
तेरे प्यार का कानून सा बन गया है .......
सुलझ रही है बहुत सी उलझने जब से तू मुझे मिली है ....
पतझड़ बहार जैसे बन गयी है जब से तेरे होठों की कलि खिली है

तुम मेरे ज़िन्दगी में
लेके आयी हो एक नया सवेरा
आवारा मेरे धडकनों को आज
मिल गया जैसे तेरे प्यार का बसेरा |
राहें जो कुछ अनजाने से थे आज मैं उन्हें जानने लगा हूँ
जिन बातों पे शायद न था यकीन उनको भी मानने लगा हूँ |

तेरे प्यार का साया
मेरे तपते अरमानो पे कर गया चाओ
बुरे जो कोई ख्याल कभी आते है
वो लौट जाते हैं आज करके उलटे पाओ |
सारा जहाँ ढूँढता भी तो शायद न मिलता कोई तुमसा हसीन
धुंधले से मेरे सपने जो थे .....वो न होते यु रंगीन |

धडकनों की तेज़ी करती है एलान
आज मेरे इस दिल के इंक़लाब का
शायद सामना करना होगा
तुम्हे आज मेरे प्यार के सैलाब का
रिहा करदो मुझे तुम आज मेरे दिल के जंजीरों से
मेरे प्यार के राह पर लिखतो दास्ताँ आज अपने हाथों के लकीरों से |


Her arrival seems like a change of season which you are always expecting. However, it is very important, as I always say, to communicate this to her, in her way of understanding.

Love,

Kalyan

Friday, August 27, 2010

Khafa hoon main....Par phir bhi pyaar hai (I am angry but still in love)

Yesterday I had written a poem in which there was a lot of curse involved. It described about the situation where there were malicious tones raised by the lover betrayed against the person he loved. As I clarified in a note that these were the products of the emotional outbursts that a person has when he has gone through such kind of a situation. However, after some time the person realizes that what he probably said was not right. He realizes that by saying such things he has actually not justice to love, his love, forget about the person who betrayed. The poem below of mine reflects such ideas.



ज़बान ने कल जो आग उगले थे
वो आग की लपटे क्यों मुझे ही जलाते है?
साथ तो तुमने छोड़ा जब सावन जोरो पे था
फिर आज अंगारे क्यों जाल फैलाते हैं?

मैंने न सोचा था की आएगा ऐसा भी दिन
जब जी भरके मैं तुम्हे मैं दूंगा बद दुया
प्यार को कहीं छोड़ के मझधार में
ये सोचूंगा...की हाय वो प्यार का आखिर क्या हुआ?

जाना तुम्हे था ही सो तुम चली गयी
फिर मई क्यों मनाऊ रुक्सत का त्यौहार ?
कोसके तुम्हे यु रात और दिन क्यों
मैं दूर करू ज़िन्दगी से हर बाग़ हर बहार ?

सोचता हूँ आज की शायद कहीं
रह गयी कमी मेरे प्यार के कशिश में ;
फिर सोचता हूँ की कैसे मुमकिन है
की बेरंग सुर आ सके इस इश्क के बंदिश में ?

कहाँ मैं सोचता था की मैं और तू
बनायेंगे एक नया आशियाँ
आज दीखते है मुझे टूटे कुछ घरोंदे,
हैं बहुत सा फासला और कुछ दूरियां |

ज़ख्मो में कुछ नमक तुम्हारे अश्को का भी है शायद
इसीलिए आज कराहता हूँ में करके तुम्हारे शक्ल को याद|
प्यार अभी भी कहीं बचा है मेरे दिल में इस पहर
शायद तभी मुझे दीखता है अँधेरे में भी सेहर |
जो आज शोले उगल रहा है ज़बान
ये तुम्हारे विरह के अंगार से जला है
दुनिया की शायद रीत ही है ये
की ज़ख्मो के साये में हर आशिक पला है |

Whatever happens you cannot curse the person you love. Even if you have cursed her on her betrayal it is just an emotional outburst.

Kalyan

Dil Toda Achchha Kiya......(You did good breaking my heart)

A heart-break brings about a gamut of emotions. Sorrow, anger, frustration and also love. My poem below talks about a story of heart-break that happened to a person who could not digest that in any way and ended up cursing the love of life in a very bad way. Read on to find more.



इस दिल में जो तूफ़ान है
उस तूफ़ान में कहीं कुछ मिट गया है
धडकनों का ऐसा शोर हुआ की
गरजता बादल आज सिमट गया है
दिल के तारों का कहना क्या, उनमे कभी भी होती है राग
पर यह दिल ही है आज ....जो उगल रहा है यह आग
गरम साँसे आज देती है गवाही कुछ अनहोनी होने का
सिसकियों की चादर ने ढाका है यूँ दिल के रोने का


बात इतनी सी होती तो शायद यूँ कोहराम न मचता बाज़ार में
नाम होता हमारा तो बदनाम न होते तेरे प्यार में
जिस्म पिघलाके मेरा रूह कहीं तो रह गया है तुम्हारे पास
प्यार आज खो गया है पर छोड़ गया है प्यार का एहसास
उस रूह को तुमने भी कहीं बाँध के रखा है किसी कोने में
मेरे रूह की नमी तभी दिखती है कभी कभी तेरे रोने में

जहां छोटा नहीं है पर तू कभी भी नहीं जा सकी मुझसे दूर
तेरे प्यार की गहराई.....इतनी? की आज फासले भी हैं मजबूर |
जाना चाहती हो? बेशक जाओ पर लौटा दो वो सारी यादें
पुरे न कर सकी जो तुम.....मुझे याद दिला दो वो वादें ;
उम्मीद मुझे है और शायद कहीं है मुझे यकीन भी
तेरी बे रुखी पे आज थोड़े झुक गयी है ज़मीन भी |

भादों का यह आना बिन बुलाएं प्यारे सावन के मौसम में
जैसे कहीं दाखिल होना बावल का कोई मखमली गुलफाम में ;
इस जुदाई के भादों को तुम पहना दो आज बादल का जोड़ा
झूठा ही सही....लगेगा मुझे की कहीं सावन ने दिल है तोडा |
सुकून मुझे मिलेगा जब तुम भी बहायोगी आंसूं करके इंतज़ार
पर बाद-दुआ भी कैसे करून मैं जब की अभी भी कहीं बचा है प्यार ?

मेला सा कहीं दिख तो रहा है पर कहीं कोई शोर नहीं हैं
अकेला हूँ बस अकेला मैं ....तू नहीं तो कोई और नहीं हैं |
वीरान जहाँ को फिर भी मैं करूंगा फिर से चाहतों से आबाद
नहीं होने दूंगा किसी बेवफा के प्यार में एक और आशिक को बर्बाद |
तुमने शायद सोचा की जाते जाते ले जाओगी तुम सारे रंग
सच है थोडा बहुत मगर हम सफेदी में भी ढूंढ लेंगे उमंग |

मेरे आंसूं से कैसे निखरेगी तुम्हारे हाथों की मेहँदी
अरमानो के खून में चमकेंगे कैसे सोने और चांदी?
दिख रहा है मुझे तुम्हारी बिखरी हुई ज़िन्दगी मेरे बिना
पर सच है कहीं की अपनी खुशिओं को तुमने खुद ही छीना |
सेहरा सजाऊंगा मैं तुम्हारे सफ़ेद होंगे उनमे हर एक फूल
तुम थी कभी कहीं ......आसानी से मैं जाऊँगा भूल |

दुआ है मेरी ऊपर वाले से की दे तुझे दस गुना यादाश्त
भुला न पाए मुझे हो न तुझसे दर्द बर्दाश्त!!!!
मैं तुझे भुला दू और फिर कभी भी न करून तेरा अरमान
पर मेरे प्यार में अटकी रहे साथ जन्मो तक तेरी जान |
सहम के , सिसक के कभी जब तू आयेगी कभी मेरे दर
देखेगा तेरी हार ...मेरी हसीं उड़ाता यह शहर


Remember a broken heart is more dangerous and disastrous than a nuclear bomb!!!!!

Kalyan

Wednesday, August 25, 2010

Intezaar tumharey nazron ka ( waiting for that one sight)

Sometimes love is all about one sight of goodness that is showered upon somebody who loves you. There are people who are "practical", "Pragmatic", "real", "robust" but yet are captured in this unnerving feeling called love. This poem written by me is for those "Pragmatic" people who are so much in love but yet abashed to confide their feelings. This is a very rude sequel to my earlier poem pyaar chhupana. One can have a kind of a feeling of chauvinism in this poem, however this is how a "Practical" Man is, waiting for a confident signal, which is very rare to come.



बेरुखी तुम्हारी एक आदत सी बन गयी है
हमें यूँ बुलाना.... फिर हमही से नज़रें चुराना
एक शरारत सी बन गयी है ;
दिल तुम्हारा भी जानता है की प्यार तुम्हे हम से है
फिर तुम्हारा यूँ प्यार छुपाना
हिमाकत सी बन गयी है |

मेरी मोहाब्बत का इल्म तुम्हे होगा
मुझे इस पल की उम्मीद नहीं है शायद ;
मेरे धडकनों की ज़बान तुम समझोगी
मेरे दिल को इसकी ताकीद नहीं है शायद ;
पर जानता हूँ की बेक़रार तुम भी उतनी हो मेरे बिना
मेरे वीराः में निसार तुम भी उतनी हो मेरे बिना |


मौसम आज कहीं मुझे इशारा कर गयी है ,
मेरे ठंडे अरमानो में कुछ शरारा कर गयी है
कहते है ये बादल मुझसे के तुझपे मैं कुर्बान हो जाऊं
तेरे हर अंदाज़ पर यूँ ही मैं बेजुबान हो जाऊं |
दिल की सुनु मैं .....या सुनु मैं इस कमबख्त अक्ल की
सुरूर में तेरे झूमू में .......या देखू तासुर तेरे शक्ल की |


कहती कुछ नहीं तुम मुझसे पर
नज़रें बयां करती हैं हाले-दिल तुम्हारा
होठों से कलियाँ फूटती नहीं हैं,
पर आँखें करती हैं बेख़ौफ़ इशारा |
इशारों पे तुम्हारे भी मैं जी लूँगा
आँखों से तुम्हारे यु जाम पी लूँगा |
पर शायद ये ज़माने का तरीका नहीं है
दिल लगाने का सनम ये कोई सलीका नहीं है |


चाहता मैं तुम्हे बहुत हूँ ,
इसलिए तुम्हारे पास पास रहता हूँ
भूल से भी कोई भूल न हो तुम्हारे साथ
रब से ये बार बार कहता हूँ |
तुम सुन नहीं सकती मेरे खामोश दुआओं को
दिल अभी भी तुम्हारा अनजान हैं ,
कानो को अपने यूँ तकलीफ न दो ,
ये दुआएं मेरे दिल की ज़बान हैं |

मैं सिकंदर हूँ मेरे जहाँ का फिर भी
शिक़स्त मैंने खाई है उन पलकों की छाओं में,
मेरा वार चलता है हर सूबा में पर
धडकना अभी भी कहीं गिरवी है तेरे पाओ में |
ज़िंदगी की खैर मैं माँगता नहीं तुझसे,
मांगना मेरी शायद आदत नहीं हैं ;
गर तू मुझे न दे मेरे ज़िंदगी यु ही
मन मैं लूँगा की तुझे भी मोहब्बत नहीं हैं |

क्या तुम मेरे आँखों में मेरा प्यार देखती नहीं हो ?
उन दबे होंठों में इज़हार देखती नहीं हो?
मेरे रूखे से आवाज़ में क्या नहीं सुनती तुम तुम्हारी पुकार ?
क्यों बहरी हो तुम मेरी तरफ .....क्यों रहती हो परे मुझसे बार बार?
फिर भी खामोश ये मन क्यों तुम्हे चाहता है,
तुम्हारे बिना क्यों ये बेचैन रहता है ?

अगर कहीं तुम समझ न पाओ इस दिल की ज़बान को
तक़ल्लुफ़ न करना तुम ......न देना तकलीफ अपने अरमान को ........
करूंगा मैं तब भी इंतज़ार तुम्हारे नज़रें करम का
सकत दिल जो तुम्हारा है.....उसके नरम होने का |



So be a bit imaginitive. Sometime being practical doesn't pay off.

Kalyan

Tumse Milna Dobaaraa.....(Seeing you once again...)

Sometimes you can get into a very uncomfortable state when you suddenly meet someone you loved before but then time didn't allow your relationship to go ahead. It engrieves you even more to see that probably if something could have been done from your side there could have been a kind of improvement in the state and there would have been no seperation at all, however you just can't help it. This poem of mine talks about a similar kind of a story.




आज मुझे इन वादियों ने क्यों घेर लिया है
रंगों ने कहीं मुझसे मुह फेर लिया है
तेरे केसू से काले बादल आज बरसाते हैं पानी
तेरे प्यार से शायद महरूम सी रह गयी मेरी जवानी |



अचानक तुझे इस मोड़ पे देखके मैं हूँ परेशां
सोच मेरी रुक सी गयी हैं और हूँ मैं बेजुबान
हमने कभी खेली थी इश्क की आँख मिचोली
आज उस इश्क पे क्यों बांध हैं दोनो की बोली |
प्यार कहीं आज छुप सा गया हैं बादल के पीछे
लाभों की लाली आज कहीं हैं लाभों के नीचे
मेरे - तेरा दिल कुछ इस तरह करते हैं बातें
जैसे रौशनी चीरती हों काली रातें |



कहना तो बहुत कुछ चाहती हो तुम
पर ज़बान साथ नहीं देती आज
कुछ उलझा सा मैं हूँ इस कशमकश में कहीं
पर हाथों में मेरे तू हाथ नहीं देती आज |
क्या हुआ? पता नहीं , पर सोचता हूँ
वक़्त ने जब ली थी करवट
मैं शायद समझ नहीं पाया
की क्या हैं प्यार और क्या हैं बनावट |




आज मिली हो तुम मुझसे
तो मुझे भूलने पर हो शर्मसार
मेरे माजी को तो फिर उभारती हो क्यों
क्यों करती हो आज भी मेरा इंतज़ार?
हमने अलग की थी जो राहें
उन राहों को आज क्यों मिला रहीं हो?
मेरे ज़िन्दगी की तार बड़े नाज़ुक
हैं उन तारों को क्यूँ हिला रहीं हो ?




वो चौराहा देता है गवाही
मेरे तेरे बिछड़ने का
वक़्त गिन गिन के लेता है बदला
वक़्त की चाल को छेड़ने का
देखता हूँ मैं की आगे मैं आ गया हूँ
तुम अभी भी कहीं उस चौराहें पर हो
मुझे मुझसे दूर करके भी
तुम सिमटी यूँ आपनी बाहों में हो |




मुझे देख के आज तूम फिर सेफैलाती हो क्यूँ बाहें?
अलग हैं आज मेरी राहें ......तुम्हारी राहें.........
सावन को मैं फिर भी रोक लूँगा बरसने से
पर तरस मैं जाऊँगा फिर भी तेरे तरसने से |
मत लो तुम यूँ मेरे सब्र का इम्तेहान
पत्थर जितना सख्त नहीं हैं मेरी जान |
तुमने तो आज भी जंग छेड़ने का किया हैं फैसला
पर इस जंग को लड़ने का नहीं हैं मुझमे हौसला |




इस उम्मीद पर आज मैं लेता हूँ तुमसे अलविदा
की अब कभी मिले किसी जनम में तो न हो हम जुदा .........

Remember it is always good to mend a relationship than actually slap on it.

Love
Kalyan

Monday, August 23, 2010

Pyaar chhupana......(Hiding Love)

Most love stories in India atleast end on the first instance. This is because of the fact that there is no communication or no initiation. Despite immense love there is this hesitation to admit or confide. This is a poetic version of one such love story, that ended from one side but still remained alive on the other side. This poem of mine is dedicated to one such person.



आज आसमान की बुलंदिओं पर
पूनम का चाँद इतराता है ,
तुम्हारी आँखों में देख कर तुम्हे कुछ कहने को
ये दिल आज भी क्यों कतराता है,
प्यार कहीं किसी कोने खेलती है आँख मिचोली
मन कहीं फिर भी उसे छुपाता है |

तुम्हारे नज़रें बयां करती है मुझे
कहीं न कहीं तुम्हारे दिल का हाल ;
मैं कहीं खड़ा हूँ तुम्हारे पास और तुम मेरे पास
बीच में बुन रहा है कोई प्यार का जाल |
कहता तुम्हे कुछ नहीं हूँ ....पर मेरा प्यार तुम्हे बुलाता है
दिल कमबख्त फिर भी तुम्ही से छुपाता है |

पैरो की आहट सुनने पर
क्यों धड़कन कुछ थम सी जाती है ?
वो आहट जो न हो तुम्हारी
तो आँखें फिर क्यों नाम सी जाती है ?
तुम्हारे दीदार को यह दिल हज़ार बहाने बनाता है
फिर भी कही दिल तुम्ही से ये बात छुपाता है |

तुम्हे देखके आते हुए दूर से
थमती है ज़िन्दगी की रफ़्तार ,
जब लगता है की मैं हूँ आज़ाद तब
होता हूँ तुम्हारी नज़रों में गिरफ्तार |
तुम्हारे आने पर ....ये दिल यूँ ही लुभाता है
पर दिल का क्या करू जो तुम्ही से बात छुपाता है |

होती जो तुम नहीं पास कहीं
एक बिजली सी गिरती है कहीं इस दिल के पास,
जुदाई में तुम्हारे मैं आंसूं इतने बहाता हूँ ,
आँखों की नमी कराती है प्यार का एहसास |
बातें है इतनी .....खामोश लम्हों में...दिल चुप रहता है
बातों का मोल क्या जब ये दिल तुमसे बात छुपाता है |

आज जो पलटता हूँ मैं पन्ने इस दिल के,
कोरे से कुछ कागज़ दीखते हैं क्यों ?
उन अन-लिखे कागजों के सफेदी में
मेरे सपने सियाही से लिखते है क्यों?
प्यार का फ़साना जो बीत गया .....
दिल आज वोही फ़साना दोहराता है.....
प्यार इतना था ... की पूछो नहीं
पर आज भी तुमसे प्यार छुपाता है |
दिल गूंगा है ......इसलिए धडकनों से काम चलाता है
समझती जो तुम धडकनों को ......फिर जानती तुम
ये दिल .......क्यों बात छुपाता है .............

So speak up before it is too late.

Love,

Kalyan

Pyaar me Deri.... (Delayed Realization of Love)

Love is sometimes identified very late. The feeling you might have not thought as love may turn out to be so after long long time. But when probably you realize the time and reasons are not appropriate to accept the same.Time just slips out of your hands. The poem below is all about the distance of time that comes between love.



संभल के जब तुम करती हो मुझसे यूँ
इधर उधर की कुछ बातें,
बेशरम सी ये हावाएं गुदगुदाती है मुझे,
रोशन होती हैं मेरी काली रातें |

अजनबी से कुछ ख्याल कभी जो
आते हैं मेरे ज़हन के करीब,
तुम्हारी यादें ही तो हैं कुछ धुंधली सी,
जो लिखती हैं मेरा नसीब |

ज़िंदगी सोचता हूँ के बीत जायेगी मेरी,
गर तुम न भी हो मेरे साथ,
पर शायद कहीं आज भी एहसास हैं उस पल का,
जब हाथों में था मेरे तुम्हारा हाथ |

न जाने आज भी क्यों मुझे लगता हैं
तुम हो कहीं न कहीं मेरे दिल में ,
आज भी मैं कहीं कुछ वीरान सा हूँ
इस ज़िन्दगी के भरी महफ़िल में |

न वक़्त का मुझे अब रहा कुछ लिहाज़,
न रहा मुझे ज़माने का कुछ डर,
तुम आज जो न हो मेरे साथ तो अब
बस कट रही है यूँ ही मेरी उमर |

अरसा जैसे बीत गया हैं
खामोश सी एक दीवार है जैसे
मेरे तेरे बीच यह दूरियों से,
वक़्त भी शर्मसार है जैसे,
कभी बरसता था जिस बादल से पानी,
आज कहीं वोह जर्जार है
मैं समझता था जिसको एक नज़र का छलावा
आज मुझे लगता है शय वोही पयार हैं |

बातें आज मेरे कानो को असर करती नहीं,
क्योंकि तेरी आहट मुझे सुनाई देती है हर दम,
सावन तो मेरे मुल्क में कई आये और गए,
पर ज़िन्दगी में मेरे अभी भी हैं पतझड़ का मौसम |

तुम मुझसे खफा हो पर मुझे क्यों तुम्हारा इंतज़ार हैं,
बे-ईमान मेरा यह दिल कह रहा हैं की शायद
येही प्यार हैं |

रात का अँधेरा जो कभी चुप के से समाता हैं,
तुम्हारे साथ बीते वोह एक छोटा सा पल
मुझे याद आता हैं |

खुद को में तेरा आशिक कह कर,
आज ज़िक्र तेरा क्यों सरे-आम करूँ ,
ज़िन्दगी मेरी और तेरी आगे बहुत बाकी है,
तो मौत का क्यों इंतज़ाम करूँ |

वोह इश्क का जूनून हैं जो कभी
मुझे तुझसे बार बार मिलाता हैं,
कुछ उन्स ऐसा हुआ है
जो पतझड़ में फूल खिलाता हैं |

ज़माना शायद मुझे बक्श न दे,
हूँ मैं इस सज़ा के लिए भी तैयार;
तब सोचता हूँ मेरे हमनशीं
की शायद यह ताक़त ही हैं मेरा प्यार |

बिछड़ने न मुझे तुझसे कोई खास ग़म नहीं हैं,
पर यह दिल क्यों कह रहा है की जुदाई का मौसम नहीं हैं|
मुझे मालूम हैं की आज भी हैं उन होठों पर एक इनकार,
पर शायद दिल कह रहा है की तुझे आज भी हैं मुझसे प्यार |


Don't let that feeling go away!!!!!

Love
Kalyan

Tu Mujhe Har jagah dikhti hai ( I see you everywhere)

Sometimes you only see what you want to see. Love makes you so focussed that you only see her whenever you close your eyes. You only hear her when there is silence and you really want silence to prevail so that you can hear her more. The poem is about the same.



आँखें मेरी बंद होती है,
तो कहीं न कहीं दीखता है तेरा चेहरा,
बरसात की कुछ बूँदें, कुछ अनसुनी सी आवाजें,
खुशनुमा बनती हैं, बांधके मेरे सर पे सेहरा |

यकीन नहीं आता मुझे की कब
तेरे प्यार में हो गया मैं गिरफ्तार,
क्यों आज वक़्त थम गया हैं,
धीमी आहटों ने बाँध दी हा रफ़्तार|

ग़म मुझे जब होता है,
तो याद करता हूँ मैं तेरा मुस्कुराना,
वोह चुप के से तेरी आँखों से,
मुझे कुछ हज़ार दास्ताँ कह जाना |

क्यों आज मद्धम लगती है मुझे,
हर रौशनी जो चमकने का करती हो दावा,
क्यों मेरे कानो में आती हर आवाज़,
कहीं न कहीं सुनती है तुम्हारा बुलावा?

वोह इस तरह कभी तेरा रूठ जाना,
मेरे दिल को करता है क्यों बेकरार?
वक़्त की हर चाल पर भी क्यों,
मुझे रहता हैं तुम्हारा इंतज़ार ?

ज़मीन मुझे कम पड़ती हैं,
इसलिए तेरे प्यार ने मुझे पर लगा दिए|
आसमान मेरा घर बन गया,
तेरी नज़रों ने आज नश्तर चुभा दिए |

मैं चुप बैठा हूँ यूँ तेरे प्यार में,
की शायद तेरी आवाज़ मुझे सुनाई दे,
आँखें अब भी बंध मैं कर लेता हूँ,
की शायद तेरी सूरत दिखाई दे |

Love,

Kalyan

Pehle Pyaar ki Kahaani (Story of First Love)

It is very difficult to forget the first instance of love, though you may never know that it really was love or not. However, that feeling that happened for the first time would always be regarded as love somehow. My poem below talks about the same feeling.



पहले पहले कदम जो डगमगाए
कहीं दूर रह गयी वो बेख़ौफ़ जवानी
दिल के अभी भी पास है जो
है ये मेरे पहले प्यार की कहानी .........

दिल से सोच्ताथा जब मैं
दिमाग पर जोर नहीं रहता था ;
बस देखताथा तुझे ही तब मैं सिर्फ
ख्याल में कुछ और न रहता था |
ज़िन्दगी में लेके आयी थी जो नयी रवानी,
वो है मेरे पहले प्यार की कहानी .......

दोपहर कब बीत जाती थी
कब हो जाती थी इंतज़ार में शाम,
तारो को मैं बस गिनता रहता था यु ही,
नहीं होता मुझसे तब कुछ काम
पागल सी ज़िन्दगी में तू ही तो थी सायानी,
बस ये है मेरे पहले प्यार की कहानी......

तुझको देखना यु की मुझे तो न देखे देखते हुए,
दिल को संभालना यु की कहीं कोई न देखे बेहेकते हुए,
प्यार ने क्या किया था तब, क्यूँ अरमान हुए बेलगाम,
नशे में मैं क्यूँ झूमता था जब खाली था मेरा जाम
बंजर से ज़मीन पर जब उगी थी यु फूलों की टहनी
ये हैं मेरे पहले प्यार की कहानी ...........

कड़ी धुप में आज भी जब मैं कहीं निकलता हूँ,
याद मुझे आता है तेरा छत पर आना ,
तुझे तेरे छत पर देखना सुखाते दुपट्टो को,
कुछ तुझसे कहना और बहुत कुछ न कह पाना
कभी तेरे होठों की मुस्कराहट, कभी मेरे आँखों में पानी
क्या है आखिर यह?????
मेरे पहले प्यार की कहानी.............


It is very difficult to forget your first Love.....

Kalyan

Sapney Tumharey..... (Your Dreams!!!!)

Your love may be unrealistic, but there is one thing towards which you may have full control. These are your dreams. Your dreams are in your control so dream so good that your morning becomes better and full of hope.





इस तरह से आज सावन ने छेड़ा है राग,
दिल में कहीं देहेक उठी वो पुराणी आग
मुझे इन बूंदों से कोई बैर नहीं है
मेरे सपने ही कुछ ऐसे है की उड़ते है वो
उनके पैर नहीं हैं |

सूरज आज कहीं छुप सा गया है
बादल ने उसपे पर्दा सा डाल दिया है
सुबह के धुंधलेपन ने कहीं
मेरे सपनो का भी ये हाल किया है |
तुम्हारी बोली जो शहद सी टपक रही तुम्हारे होंठों से
वो मोती से लफ़्ज़ों ने मुझे निहाल किया है
क्या बताऊँ आज तो सावन ने भी
बिन बताएं कुछ कमाल किया है |

सीधी बातें आज कहीं लेती है अंगडाइयां
मुझे पहेलियों ने तुम्हारी बेहाल किया है |
आँखों से तुमने जो किये इशारे
उन इशारों ने भी कमाल किया है |

क्यों लगता है की मद्धम सी कहीं हवा चल रही है
नीले लिबाज़ में तुम कर रही हो इंतज़ार
समंदर के किनारे खड़ी हो तुम अरमानो को बांधे
लहरें भी तुम्हारे सपनो से होती हैं शर्मसार |
आता हूँ जब मैं तुम्हारे करीब तो
सागर कुछ देर के लिए थम सा जाता हैं;
बाँहों में तुम्हे लेके यूँ जब मैं देखता हूँ गहरे समंदर को
बंजर सा मेरा जीवन भी कहीं नाम सा जाता है |

ज़माने को खबर न हो इस तरह तुम
मेरे दिल को रोज़ देती हो आवाज़
शोर में कहीं खामोश प्यार दब न जाएँ
इसलिए इश्क को बनाके रखती हो राज़ |
ख्वाबों का लेकिन मैं क्या करू
ये कभी भी आ जाते हैं बे रोक टोक
यह कुछ सावन की तरह है
जो जश्न मानती है बरसात का
नहीं मानती गर्मी का जाने का शोक |

जिन्गदी में न रहो नो न सही
सपनो से तुम्हे कैसे भुला दूं
मैं जानता हूँ की वो समंदर का नज़ारा नहीं हैं सच्चाई
पर ख्वाब इतने हसीं जब आये
तो खुद को कैसे सुला दूं |

When dreams are so beautiful, then one really doesn't want to sleep.

Love,

Kalyan

Aansoon Tumhaare......(Your Tears)

I wrote a poem on the tears that are being shed by someone. It gives you a lot of mixed feeling when you see tears from the eyes from which you don't really want to see tears. The tears actually mean a lot to somebody who is actually in love.



आज लगता है की भीग गया है सावन भी,
आंसुओं के सैलाब में तेरे पिघल गए है अरमान भी,
तुम्हारे अश्क की वोह बूँदें गिरी जो इस ज़मीन पर,
खुदा भी कहीं हुए मेहरबान मेरे हमनशीं पर |

खामोश ये बादल आज अचानक गरजने लगे,
देखके तुम्हारे आंसू आज समंदर भी देहेकने लगे
दुपट्टा तुम्हारा जो करता था बयां कई दास्ताँ,
आज वोही लहराते देख कई ईमान बेहेकने लगे |

नशा जो तेरी मुस्कराहट में छलकता था,
उस नशे को आसुओं ने तेरे कुछ बे-असर किया है ,
लेकिन इन अश्को में भी नशा तो अलग है,
अभी भी लगता हैं जैसे मैंने पिया है |

तेरी आँखों के झरोखे आज अश्को से जो हुए नम,
भीग गया जैसे उन बूंदों में यह सारा आलम |
अब तक जन्नत में भी हो रहा होगा तेरे ग़म का ज़िक्र,
खुदा को भी जैसे होगी तेरे सलामती की फ़िक्र |
आंसूं तेरे क्या बहे, पूरा ज़माना हुआ ग़मगीन,
खारे खारे अश्को ने समां बना दिया नमकीन |

बरसात भी जैसे आज तेरे ग़म से शर्माती हैं,
उसे भी कहीं तेरे अश्को की फ़िक्र सताती है |
बूँदें ओस की आज जैसे कुछ हैरान से है,
तेरे अश्कों को देख वो भी परेशान से है |

छुप के जो तूने किया हवाओं से इजहारे ग़म,
बे-ईमान हवाएं भी गए थम |
पता तेरा तो हवाओं ने भी आज दिया नहीं,
वक़्त ने भी आज इंतज़ार किया नहीं |

देख कर यह जलवें में कुछ बेबाक सा हूँ,
लगता हैं की गिर रहा हूँ सोते सोते ,
तुम्हारे हसीं ने तो मार दिया ही था,
अब दफना रही हो तुम रोते रोते |

तुम्हारे आँखें आज बरसा रही है
न मिलने वाले अनमोल मोती,
शायद कई आबाद हो जाते तेरे ग़म में,
जो कभी तू थोडा और रोती |

सिसकियाँ तुम्हारे आसुओं के ऊपर,
जैसे खीर के ऊपर जड़े हो किसमिस,
उन सिसकियों में मेरे नाम का यूँ आना
जैसे तेज़ आवाज़ में मद्धम सी फिसफिस |

लगता नहीं मुझे की होगा कभी मुझे इन आसुओं का मोल,
कैसे मेरे जज्बातों को मैं दू इस ज़माने के नज़र में तोल|
बर्फ पिघल के जैसे धीरे धेरे बूँद टपकाते हैं,
आँखे तेरी उसी तरह जैसे अश्क बहाते हैं |

आसमान कहीं आज सुनसान रहेगा देख तेरे आखों की नमी को,
बादल आज नहीं रहेंगे करने पूरा पानी की कमी को |
तुम्हारी आँखें जो इस तरह अश्क बहाएगी,
वक़्त के साथ बरसात भी भीग जाएगी |

गीली गीली पलकें तुम्हारी क्यों राज़ छुपाते हैं,
अश्कों के तालाब में हर ज़ख्म डुबाते है |
उठ के देखो तुम्हारे अश्कों में डूबा है सारा ज़माना,
शम्मा पर जलने से पहले ही भीग गया परवाना |

Remember one can see fire in the world but cannot see the tears of his lover.

With lots of Love,

Kalyan.

Sunday, August 22, 2010

Ladappan ka Zamana (Those Immature Days)

Call it love, call it attraction or call it infatuation; it always happens with all of us. Well, and why not? Some of us are abashed on the mention and some of us just recollect them as sweet memories. Today I also remember one of those incidences that may have happened with all of us. Presenting you my latest poem "Ladappan ka Zamaana".




इंतज़ार का वो एक पल

जब तेरी धड़कने थोड़ी रुकी थी

मेरी तलाश में जब

आँखों की पलकें यूँ झुकी थी

याद है आज भी मुझे वो तेरा वक़्त से रूठना

कैसे भूलों में वोह लड़प्पन का ज़माना ........



दिल के यूँ धड़कने का जब

मतलब मुझे पता न था ,

तुझे यूँ रिझाने का जब

करतब मुझे पता न था

नशे में झूमने के लिए जब काफी था तेरे आँखों का पयमाना

कैसे भूलूँ मैं वोह लड़प्पन का ज़माना ......





कोने से मेरे खिड़की के

देखता मैं जब बादल तेरे बालों में

झंकार सी यूँ होती थी मेरे दिलमे

जब हिलकारें पड़ती तेरे गालों में|

तेरे गालों के उन हीलकारों में डूबने में मेरा मन क्यूँ माना

कैसे भूलूँ मैं वोह लड़प्पन का ज़माना .......



जब तुम कभी बहाती थी आंसूं

तो आग क्यूँ लगती थी मेरे हर मकाम में ?

तुमसे मिलना ... तुम्हे मानना... देखना तुम्हे यूँ ही

कहीं सुबह घुल जाती थी शाम में?

तेरे उन आसुओं में मेरा यूँ ही तर जाना ......

कैसे भूलूँ मैं वोह लड़प्पन का ज़माना .........



तुम हो आज कहीं दूर या पास

पता नहीं क्यूँ फिर भी मुझे हैं आस

दुआ दे रही हो तुम कहीं मुझे उठाके अपने हाथ

चली तो फिर भी गयी तुम यु पल भर निभाके साथ

तुम नहीं हो पर फिर भी तुम्हारा मुझे याद आना

सच है !!!! नहीं भूलता मुझे वोह लड़प्पन का ज़माना ........


With lots of love.....

Kalyan

Saturday, August 21, 2010

Main Mangal ka Pehredar....Tu shukr ki pari (I am from Mars and You are from Venus)

As I start my blog of poetry, I start with one of the most sensitive topics in the world, man and woman. The concept that men are from Mars and women are from Venus is a very good concept and that is what has been marked in this poem of mine. As I start my new blog of poetry this is my tribute to that concept.





कुछ इस तरह हुआ है
जहाँ का बटवारा
यह ज़मीन हैं मेरा आशियाँ
और वो ज़मीन हैं तुम्हारा |
मैं तो मंगल का पहरेदार हूँ और तू परी है शुक्र की
साथ हम रहते है इस जहाँ में तो बात है फ़िक्र की |
नाज़ुक है यह अहम् मेरा .......चुभती हैं क्यों बातें तुम्हारी
मैं मंगल का पहरेदार और तू है शुक्र की परी ............


क्यों मिलती नहीं कभी यह राहें
होठ तो कहते हैं बहुत कुछ
पर फिर भी बुलाती नहीं है बाहें |
साथ ये क्यों होता है क्यों इस जहाँ पर भारी
मैं मंगल का पहरेदार और तू शुक्र की परी ...........

कहाँ किसी मुख ने की जीवन नाम चलने का है
साथ साथ न सही पर प्यार नाम मिलने का है
कुछ दूरियन तुम करो तय और कुछ मैं करू
तुम्हारे आने से पहले तुम्हारी करीबी से क्यों डरू
क्यों हर पल मुझे उलझाती है हर उलझन तुम्हारी
मैं मंगल का पहरेदार और तू शुक्र की परी ...........


तुम्हारे ज़हन में जो आता है वो मुझे क्यों भाते नहीं
मेरे हर काम का सलीका तुम्हे रास आते नहीं |
तुम्हारी हर बात का मैं पलट के क्यों देता हूँ जवाब?
मेरे हर भूल का तुम बखूबी रखती हो हिसाब |
मेरी हर बात हैं गलत और क्यों हैं सही हर बात तुम्हारी
मैं मंगल का पहरेदार और तू शुक्र की परी ...........

क्यों फिर भी अधुरा हैं मेरा जहाँ तुम्हारे बिना?
तुम नहीं तो फिर क्यों है बेकार मेरा यूँ जीना?
साथ तुम्हारा मैं क्यूँ चाहता हूँ ?
तुमसे आज मैं ये कहता हूँ
मीठा मुझे फिर भी लगता है तुम्हारा हर वार ;
अजीब हैं पर शायद .....इसी को कहते है प्यार
समझने में तुझे अब शायद बीत जायेगी ये उम्र हमारी
आखिर.... मैं हूँ मंगल का पहरेदार और तू है शुक्र की परी .........

Love is a journey and the essence of every journey is in the companionship. So live together and stay together.

Kalyan.