Friday, July 28, 2017

Rakshas.... The demon within

Many of us are unaware of the demon within that lies silent and is the biggest killer...

एक राक्षस है अंदर कहीं 
छुपा हुआ , है इंतज़ार उसे पनपने का 
मिलता है मुझे वह मेरे अंदर कभी कभी 
नहीं तो चुपके से रहता है मेरे दफ्तर के तहखानों में 
इस चूहे दौड़ के अंत में वह करता है 
मेरा इस्तक़बाल 
उगलता है कुछ तेज़ ज़हर वो 
चुपके से मेरे कानों में 

लगता हैं लोगो को ये तरक़्क़ी है पर 
खोखलापन  अंदर का कहाँ नज़र आता है 
अंदर ही अंदर मेरा राक्षस मेरे 
मन में जगह बनाता है
मेरे आस पास मेरे मेहरबानो को करता है दरकिनार 
मारता है उन्हें खंजर पीठ पर  मीठे ज़बानो से 

हर दुआ में छिपी बद्दुआ को अच्छे से ढांक देता है 
राक्षस मेरा सबके मनमे ठीक झाँक लेता है 
ये राक्षस है जो कहता है मुझको 
थोड़ा वक़्त और गुज़ारले... 
जीने के लिए वक़्त बहुत है 
आज थोड़ा सा मर ले 

Cheers...

Kalyan

Sunday, July 16, 2017

वक़्त की चाल  .... The movement of Time....







नाराज़ है वक़्त  शायद 
तब ही तो यह करवट बदल रहा है 
तख़्त से तख्ती के सफर  के बीच 
सिसक सिसक के संभल रहा है 

सफर के आखिर में आकर ये खो बैठा मंज़िल का पता 
देखने में तो समंदर है पर फिर भी जल रहा है 
बेचाल कदम इसके पड़ते है इर्द गिर्द 
बौखलाए हुए ये बस यूँही टहल रहा है।  

गुज़र रहा है वक़्त यूँही गुज़रते गुज़रते 
है ये मुझे और मेरे शहर को निगल रहा है।