Tuesday, September 28, 2010

Maine pyaar kiya Hai......

People are sometimes very thoughtful when they are falling in love. They think a lot of things. Some people even say that they are not in love. They feel that they are just having a wild emotion which is going to die down soon. My poem below explores the feelings of a person who was sometime back in love but never realized. Now retrospective about such a feeling he realizes that it was love and also feels that there was some love on the other side as well.



बहाने बनाके कब किसीने
अपनी मोहब्बत का इज़हार नहीं किया है
इशारो इशारो में यूँ ही कब
किसी अजनबी को इश्क का इकरार नहीं किया है?
बताओं तो सही इस जहाँ में कब
किसीने प्यार नहीं किया है ..........

किताबों के किनोरों से कभी
यूँ ही हुस्न का दीदार किया है ,
उस हुस्न ने भी खुद को देख कर आईने में ,
गुलाबी गालों पर मुस्कराहट निसार किया है |
कहते है बुत जिसे.....उस बुत ने भी कभी
किसी न किसी से प्यार किया है ...........

फोन के किनारे बैठ कर मैंने
घंटो तेरे रिंग का इंतज़ार किया है ,
मासूम सी चाहत .....ठंडी आहों ने फिर
हलके से मेरे दिल पे वार किया है |
तेरे इंतज़ार में वक़्त यूँ काट कर मैंने
तेरी रूह से भी प्यार किया है ..........

आज कभी जब सोचता मैं हूँ
तो न जाने क्यों मुझे अजीब ख्याल आते हैं
मेरी उन इश्क के दास्तानों पर
मेरे हर एक लम्हे सवाल उठाते हैं
जानता मैं हूँ की मैंने कभी वक़्त अपना बेकार किया है
पर क्या करता मैं.....की मैंने भी तुमसे प्यार किया हैं.......

कुछ लोग होते ऐसे है जो
नहीं रखते है कभी वक़्त का लिहाज़,
वक़्त अपनी चलता है चाल पर
बदल न पाटा है उनके मिज़ाज |
मेरे हर मिज़ाज में तुम्हारे ख्यालों का कतार हुआ है
या रब मैं क्या करूँ.....जो मुझे तुमसे प्यार हुआ है |

साँसों में रंग नहीं होते पर
लगता हैं सांसें मेरी रंगीन है
वैद - हकीम भी कहते है की
दिल का ये मामला संगीन है
पलकें जप्कायीं मैंने उसके पहले ही तेरे नज़रों का वार हुआ न
फिर तुम ही बताओं मुझे येही तो प्यार हुआ न ?

सितारों में ढूँढता तुझे मैं हूँ
पागल हवाओं में मैं देखता तेरा निशाँ हूँ
क्या करून जो न तू हो मेरे पास
तो लगता मैं कुछ परेशान हूँ |
हाथों की लकीरों ने अक्सर मुझसे धोखा बार बार किया है
घबराता मैं किस्मत से हूँ ....जब मैंने तुमसे प्यार किया है .....

तुम भी तो कभी मेरा नाम लेती होगी
तुम्हारी साँसे कभी तो मेरी आह भरते होंगे
तुम्हारी यह आँखें कभी न कभी तो
मेरे प्यार में खुदा से दुआ करते होंगे ?
कहीं न कहीं मेरे प्यार ने इश्क को तेरा यार किया है
तुने भी आखिर मुझसे ...मेरी तरह .... प्यार किया है .......

So when you feel such wild things are happening with you, think that this is love.

Take Care,

Kalyan

Tuesday, September 21, 2010

Jab maine tumse pyaar kiya ..... ( When I loved you )

There are instances when you might have fallen in love and then realised that the decision was only one-sided. You might feel that you made a mistake but then would like to recollect those memories as a sweet dream. My poem below is actually speaking about the nostalgia that is involved in your later life when you recollect those memories. Sometimes you laugh and sometimes you regret.



दिन में मैंने गिने तारे
रात को सूरज का दीदार किया ,
होश खोये मैंने इस तरह
की होश में आने से इनकार किया
क्या नहीं किया जब मैंने तुमसे प्यार किया ........

कहते है लोग की कभी कभी
पत्थर भी बोल पड़ते हैं ,
चींटी में अगर हो हौसला फिर
चींटी भी पहाड़ चढते है ;
ऊंचा उड़ा मैं ; फिर उंचाई से इनकार किया
दिखा मैं बौना जब मैंने तुमसे प्यार किया ......

तकते तकते कभी रह तुम्हारी
मैंने बदलते देखा दिन को शाम में ,
तुम्हारे इज़हार का किया इंतज़ार मैंने
तुम्हारे भेजे हर पैघाम में |
कभी चिठ्ठी तो कभी तेरी आहट ने बेकरार किया
वक़्त भी कुछ हुआ बेरहम. जब मैंने तुमसे प्यार किया ......

ज़माना ख़राब है मगर
यह ज़माना आज भी हुस्न का कायल है ,
दिल मेरा लाख आवारा सही
पर आज तेरे प्यार में घायल है |
कभी रफ़ी के गाने तो कभी जगजीत को अपना यार किया
इंसान से शायर बना जब मैंने तुमसे प्यार किया ........

कोलेज के खाली वक़्त में
तुम्हे देखना चोरी चोरी
समझना की कहीं न कहीं बंधी है
मेरे साथ तुम्हारी डोरी
अपने साँसों पर मैंने तेरे खयालो का वार किया
दुश्मन खुदका बना कहीं जब मैं तुमसे प्यार किया ......

आँखें जब तुम्हारे कभी पलकें झपकाती थी
रोकता मैं खुदको अपने पलक झपकाने से
की कहीं रह न जाए नज़रों से परे वो नज़ारा
जब देखू मैं तुम्हे कुछ बहाने से
खुदसे खेली आँख मिचोली और खुदको ही बेज़ार किया
हुई मेरी खूब खिचाई जब मैंने तुमसे प्यार किया ........

सोचता जब मैं हूँ आज
तो खुद पर ज़रा मैं हस लेता हूँ ,
बंधन जो छूट गया हैं कहीं
उस बंधन को मैं कस लेता हूँ
माजी ने मेरा कभी कभी जीना दुश्वार किया
फिर कभी सोचता हूँ मैं की क्यूँ मैंने प्यार किया .........


Take Care

Kalyan.

Saturday, September 18, 2010

Teree Muskaan ....... (Your Smile........)

A smile can mean a lot. It can be a notation of joy, it can hide sorrows, it can be just a facade or it can be a symbol of deceit. Smile has many faces. I have tried to describe some of the aspects of a smile. The poem of mine describes smile and its many interpretations.



गोरे गोरे गाल पे आज
कुछ लाली सी छाई है ,
यह किस बात पर न जाने
तू यूँ शरमाई है ,
मौसम बहारों का तो आया नहीं है,
फिर तुने होंठों की कलियाँ क्यों खिलाई है?
बेरंग मौसम में जो ले आयी है जान,
कुछ और नहीं है , वोह है तेरी मुस्कान .......

जब हवा ने किया था इशारा
तेरे मेरी ज़िंदगी में आने का ,
गमो ने मेरे झिझक से
रुख किया बहार जाने का
इस तरह तेरा बनना मेरे दिल का मेहमान ,
मीठा सा एहसास, तेरी वोह मुस्कान .......

आँखों की वो पलक जो
छुपके इकरार करते हैं ,
दिल की वोह धड़कने जो
मेरे दिल से प्यार करते है ,
उन धडकनों के शोर से झूमते मेरे कान
प्यार में बेहेकना यु और तेरी वो मुस्कान .....

कौन कहता है की आज भी मुजस्समे बनते नहीं
ज़रा आके देखे आज कुदरत के कमाल को ,
तेरे नैनों के तीर ने यूँ कर दिया है घायल
की अब मिलते है जवाब हर एक सवाल को |
होठों के नीचे जो वो छोटा सा तिल है,
वो बढाती है तेरे हुस्न की शान ,
वो तिल अनमोल बनता है .....जब भी देखू तेरी मुस्कान .......

जब तू कभी मुझे पुकारती है
तो लगता है की जन्नत से बुलावा आया है ,
मुझे मुझसे ही दूर करने
न जाने कहाँ से ये छलावा आया है |
छलावो में यूँ हौले हौले मेरे फस रही है जान ,
क़त्ल होता हूँ मैं ....और तू देती है मुस्कान ......

यह होठो की हरक़त हर वक़्त मासूम नहीं होती,
कभी कभी इसमें क़त्ल के इरादे भी होते है
जो दिल को तो लुभाते है और मन भी बहलाते है
लफ़्ज़ों में कभी कभी वो झूठे वादे भी होते है
दिल को जीतना पहले और फिर छुपके लेना जान
जान लेवा भी हो सकती है कभी कभी मुस्कान ......

दुनिया में जब न थे चाँद सितारे
जब पूरा जहाँ वीरान सा था ,
शायद तुम्हारे हँसी देख कर
खुदा भी कुछ हैरान सा था
तुम्हारी हर अदा में डूबा हर एक इंसान
खुदा की खुदाई भी है तुम्हारी मुस्कान ........

ज़िंदगी की नाव जब मेरी
डोलती हो यूँ मजधार में
तुम होती हो मेरे पास
मेरी हर जीत में हर हार में
नाज़ुक से तुम्हारी काया पर ताक़त का निशाँ
सच है वो तुम हो ...और है तुम्हारी मुस्कान .......

अब मुझे लगा पता की क्यूँ तुम्हे बनके खुदा भी था हैरान
शायद सोचा नहीं था उसने की क्यों हैं ये मुस्कान ?
खैर छोडो ये बातें रूहानी, ये बातें भी करतें हैं परेशान
ज़माना तो दीवाना है देख कर तुम्हारी मुस्कान .......

मुझे तो लुभाते है हर तरीके तेरे.....
तेरी हर अदा पर है मेरा रुझान
पाया है जन्नत यहीं मैंने ......जब पाया है मैंने तेरी मुस्कान ......


A smile can really mean a lot of things.......

Love,

Kalyan

Thursday, September 16, 2010

Intezaar ki aadat (When waiting becomes a habit)

There are instances when we see people wait a lot for their beloved. Our thought process may indicate the fact that these people are actually giving too much weight age to a cause that is very trivial. They might be just overwhelmed by a slight response of love that may have come their way. However, what eyes see and what minds interpret are not always the truth. There are some people who really love to wait, especially when it comes to waiting for the beloved. For them waiting is a habit; and it really gives them a good high when they wait for the beloved. The poem written by me below is actually depicting the emotion of such people who love to wait in love.




इंतज़ार में तुम्हारे मैंने आखों को खुला रखा
के दिल को है ऐतबार की होगा तुम्हारा आना;
जन्नत से बुलावा जो मेरा आया तब मैंने
यूँही टाल दिया मेरा जन्नत में जाना |

कहते है कुछ पागल की आज दिन है मिलने का
पर लगता है की अभी भी कुछ और दिन बाकी है,
महखाने में ताला लगा है जबसे तेरे आँखों से पिया मैंने,
हर मधुशाला में बेकार बैठा साकी है |

तुम आओगी इस उम्मीद पर मैंने
अभी भी बचा राखी है मेरी कुछ साँसे ;
एहसास कहीं यूँही कुचल न जाये वक़्त के पाव तले
तभी मैंने दबाके राखी है बहुत से एहसासे |

कभी खिड़की के पास तो कभी दरवाज़े पर
टिकाके रखता हूँ मैं हर ओर नज़र ;
शायद किसी आहट में मिले तेरा संदेसा
कभी तो हो इस रात की सेहर |

कई साल महीने यूँही शायद बीत गए
पर इंतज़ार तुम्हारा मेरा नहीं हुआ पूरा
ज़िंदगी की शाम में बैठा सोच रहा हूँ
की कहीं ये ज़िंदगी तुम्हारे बिना है अधूरा |

आज भी सुबह - सुबह पारिजात के फूल खिलते है
आज भी ओस गिरते है हरे हरे घास पर ;
तुम्हारा न होना फिर क्यों इतना खलता है मुझे
क्यों करती हो आज भी राज तुम मेरी हर सांस पर?

तुम मेरे साँसों में बसी हो,
नहीं हो तुम कोई बारह या चौदा का पहाड़ा ;
भुलाऊं तुम्हे तो कैसे भुलाऊँ
कैसे मारू अपने पाव पर कुल्हाड़ा ?

दीदार फिर से तेरा गर नसीब में नहीं है,
तो फिर तेरा इंतज़ार ही सही |
ये बेरुखी तेरे तरफ से जो है सो है ,
उस बेरुखी के एवज में मेरा प्यार ही सही .......

मेरा प्यार तेरे लिए पैघाम है ख़ुशी का
नहीं हैं ये कोई ग़म का इशारा,
डूबते कश्ती का मैं कोई मुसाफिर नहीं हूँ
जिसे चाहिए हो तिनके का सहारा |

करता हूँ इंतज़ार क्योंकि तेरी राह तकना अच्छा लगता है ,
तेरे मासूम जिद्द के आगे कभी कभी झुकना अच्छा लगता है |


Love,

Kalyan

Miley jo tum....... ( When I met you!!!!)

Viraah, a word that has a lot of repercussion in the phase of love. Love is actually a non existent entity without any kind of pain, and the pain is even stringent and stinging if it is that of being away from your beloved. A euphoria transcends over the parchy surface of heated emotions when you see the first glimpse of your beloved after a long long time. This feeling is really unparalleled and unexplainable. The poem of mine (which I am writing after a long time) actually explores these emotions.



गीली हावाएं आज मन को नम करती हैं,
लगता है रब भी कहीं आंसूं बरसा रहा है ,
तुझे देखने के लिए......बस युही दो पल कहीं,
पानी भी सावन को तरसा रहा है |

आँखों के इंतज़ार का आज आखरी पल होगा,
जब वे देखेंगे तुम्हारी एक झलक ;
रूमानी यूँ हो जाएगा हर मंज़र बंजर सा ,
गीली पलकों से नहीं मिलेंगे पलक |

चाँद सा मुखड़ा जब तुम्हारा
बरसायेगी नज़रों की चांदनी
दिल में कड़केगी बिजली मेरे
साँसों में होगी सनसनी |

फ़िज़ूल कुछ बहाने बनाके मैं
आ जाऊँगा तुम्हारे कुछ करीब ;
धड़कन धड़कन तुम्हे पुकारेगी
बन जाओगी तुम मेरा नसीब |

तुम्हारी मस्रूफ़िअत को मैं कुछ
मेरे मिलने का बनाऊंगा बहाना ;
तुम कहीं तुम्हारे वक़्त में उल्झोगी
मेरा तो यूँही होगा दिल-बहलाना |

तुम्हारे कानो में मैं घोलूँगा
प्यार का वो मीठा शहद ;
मिटेंगी जिससे सारी दूरियां
खुल जायेंगे हर सरहद |

सारे सूनेपन तोडके जब
मिलता मुझे तुम्हारा साथ है;
लगता है कुछ ऐसा जैसे
मिलने में खुदा का हाथ है |

शाम का आँचल ओढ़ता है
दिल मेरा जो बेताब है
प्यार की ठंडक....हुस्न की रोनक
जिन्दंगी के हसीं हिसाब है |

तुम मिलती हो तो मुझे आज
वक़्त की कुछ कमी सी है
सूखे सूखे अरमान जो थे
इनमे आज कुछ नमी सी है |

झिलमिल झिलमिल रौशनी में
जब दीखता है तुम्हारा चेहरा ;
कानो में तब आती है आवाज़ सिर्फ तुम्हारी
होता हूँ मैं बाकि जहाँ से बेहरा |

मिले तुम तो मुझे कुछ सूकून सा है
सोये अरमानो में आज कुछ जूनून सा है,
पल पल इंतज़ार का आज होगा खात्मा
प्यार में नहायेगी मेरी भटकती आत्मा |

पागल से बादल आज कुछ
खुशी के आंसूं बरसाते है
कुछ लोग इन्हें कहते है बारिश
जो सावन में भी तरसाते है |

मिलना हमारा हुआ यूँ की
जहाँ कुछ डोला अपने कदमो पर
खुशी के कुछ तराने बजे
खामोश ग़मगीन सदमो पर |

गर्म साँसे.....ठंडी आहे
जुल्फों का वो ताना - बाना
लुभाते मुझे हर अदा तुम्हारी
हर ज़र्रा तुम्हारा है एक फ़साना |

मिली जो तुम आज तो फिर करो वादा
मुझसे तुम दूर न जाओगी
मेरे दिल को बनके वीरान अब
कभी अपना जहाँ न सजाओगी |

Meeting after long days of seperation is really cool.

Love,

Kalyan

Friday, September 10, 2010

Bataa do mujhe....Tumhe Pyaar nahin

Distances sometimes can burn out the candle of love. So much so that there is a kind of feeling that there is no love existing. Distances, lead to a lot of conflicts and then finally there is this question, "Tell me do you love me or not???" The poem below actually delves into this reality of love, very cruel but very true.





तेरी हर अदा को मैं करता हूँ याद
दूर हूँ तुझसे पर मेरी हर सांस
निकलती है मेरे बदन से
तेरा नाम लेने के बाद .............
इन हवाओं में कहीं तुम्हारा निशान तो है
खो गया जो कहीं, मेरा जहाँ तो है
तुमसे यूँही कभी मैं जो करू बातें
धीरे धीरे से बीत जाएँ मेरी हर रातें

तुम नहीं हो मेरे पास पर
खुशबू तुम्हारे साँसों की है,
ओस की वो बूँदें सुख गयी है पर
नमी आज भी एहसासों की है|
दिल, धड़कन, जान ये सब कहीं
आज बातें पुरानी लगती है
वो इश्क जो था पुरजोर कभी,
आज एक भूली कहानी लगती हैं |

अरसा सा बीत गया देख के
तुम्हारे होंठों पर वो मीठी मुस्कान |
सूखे से बागीचे में आज
वीरान सा कुछ है बागबान |
होंठों के नीचे वो तिल जो है
आज कुछ धुंधला सा हुआ यादों में,
मेरे दिल के किसी कोने में
कहीं ज़िक्र तो तेरा आया कुछ वादों में |

सकपकाती बिजली जब गिरती है कहीं गाँव में
अँधेरा भी जब कभी ढूंढता बसेरा छाओं में ,
तब कभी मेरी याद तुम्हे थोडा तो सतायेंगे,
तुम्हारे खुशाली में भी वो कुछ तो तुम्हे रुलाएंगे|
पर मैं चाहता हूँ बस एक झलक मुस्कान की
गिरवी जो है तुम्हारे पास.....खैर चाहता हूँ उस जान की |
जलाती तुम हो....बुझाती तुम हो....फीर आज क्योँ हो खामोश,
तुम्हारी ये चुप्पी भी शायद मुझे कर देगी बेहोश |

बरसात की वो दो बूँदें जो गिरी थी तेरे गालों पर
बूँदें जो गिरे बनके जवाब मेरे हर सवालों पर
वो सवाल आज मैं फिर से तुमसे रहा हूँ पूछ
इस दो-राहे में मैं आज भी रहा हूँ जूज
मुझे तुम बता दो की तुम्हे मुझसे प्यार नहीं
मेरे जान के सड़के का भी तुम्हे एतबार नहीं
एक बार कहदो की आँखे तुम्हारी सच करती नहीं बयां
इन आँखों में दूर दूर तक नहीं मेरा कोई निशाँ

Why to go so far from someone, that such questions crop up. So stay close, and stay clear.

Kalyan

intezaar banee qayamat

Waiting for the beloved is sometimes a very tedious task. Sometimes the wait itself is so lethal that it may give rise to a lot of emotions which may end up killing the love that is actually nurtured with great care. The poem that I have written is describing the same feeling. In this the wait is a fatal blow to the love.



थिरकते पैरो को आज
किसका इंतज़ार है ?
आँखों के झरोखे तो बंध है
पर दिल कहीं बेक़रार है |
की सपनो में वो है कहीं पर
सामने वो आते नहीं ;
खयालो में ऐसा कब्ज़ा बनाया,
की खयालो से वो जाते नहीं |

ठंडी सी आह कहीं दिल में आग लगाती है ,
प्यार की ठंडक ही इस आग को बुझाती है |
पूनम का जो चाँद है वो आज बादलों में शर्माता है
चांदनी में कहीं आज दिल को नहीं लुभाता है |
कौनसी वो कशिश है जो मुझे खींचती है तेरी ओर
दिखती हैं तू ही तू ......सांझ हो या भोर |

पागल सी धुप आग बरसाती है कहीं
भादों का मौसम जो आ गया
नहीं रुकती मेरे दिल की धडकने
मिलने का तुझसे पैघाम आ गया |
सुना था की प्यार कहीं छुपता नहीं
पर मेरा प्यार तुझे नज़र न आया
दिन से रात मिली, वक़्त से रफ़्तार
पर हमारे मिलने का मंज़र न आया |

सुलगती सांसे है तो कहीं है ठंडी आंहे
इंतज़ार में तुम्हारे खुली है मेरी बाँहें,
तड़प तड़प के मैंने गुज़ारे है कई रातें ,
सपने मेरे सुनते है मुझे तुम्हारी बातें |
दीवाना मैं था नहीं पर लगता ये दीवानगी है
धड़कन तो बंध गए पर दिल में आवारगी है |
सुन्न होते एहसासों को मेरे क्यों है तुम्हारी तलाश
मेरे दिल को ही देता है धोका ये मेरा दिल बदमाश |

अब मुझसे देखा नहीं जाता और तुम्हारी राह
थकते थकते कहीं मिट न जाए इस दिल में तुम्हारे चाह|


Don't make him wait longer, probably then he may not need to wait for you.

Love,

Kalyan

Saturday, September 4, 2010

Dil toota hai......phir bhi hai muskaan(Heart has broken still thee is smile)

When a heart breaks it is a very bad situation. However, this is a story of a person whose heart broke but then she managed to cover every pain and every grievance well covered under her smile.



कच्ची घास पर ओस की कुछ बूँदें
इस तरह से सतह को सहलाते हैं
जैसे तेरे आँखों के आंसूं कभी कभी
तेरे टूटे दिल को बहलाते है |
दिल टूटने की आवाज़ जो कहीं कोई सुन पाता
क्या पता फिर ये सावन भी शायद जाते जाते रुक जाता |

दिल लगाया जो तुने उस बेदर्द के साथ
तो शायद जो हुआ वो अच्छा हुआ |
तेरे दिल के टूटे किनारों में कही
झूठे वादों का खुलासा सच्चा हुआ |
प्यार की बाज़ी हार कर भी कहीं मुझे तू लगती है फतेहबान
खुदा कहीं अगर देख रहा हो तो आज बना तेरा निगेहबान |

सर्द साँसों में तेरे कहीं ठंडी सी आह छुपी है
जुदा होते राहों में आज मिलने की राह छुपी है ,
सन्नाटो के भवर में आज तू जब देती है कही आवाज़
गूंजती है हर बात तेरी ....बोलते है हर अलफ़ाज़
क्यों मुझे तुम छोड़ गए .....क्यूँ मेरा दिल तोडा तुमने
करके मुझसे कई वादे क्यूँ हर वादों से मुह मोड़ा तुमने?

बिखरी जो तेरी जुल्फें है
बुनती हैं ये विरह का ताना बाना
ढूंढती आँखें आज भी कहती है ,
लौट आओ तुम,,,,यूँ न जाना!
धड़कन धड़कन सुनाती है आज कहानी बे वफाई का
थोड़ी सी भी मुस्कान कहीं इशारा है जग-हसाई का |

पल पल बहता आँखों से नीर आज
सौ समंदर का ले आयी है सैलाब
बातें तुम्हारी अब वो सवाल बने है
जो ढूँढ़ते रहते हर पल जवाब |
फिर भी कहीं तुम देती हो तुम्हारे खैरियत की तक़रीर
मुस्कान अभी भी हैं उन होंठों पर ....जब बिखरी सी है तस्वीर |

May God bestow everybody the kind of strength that she has.

Kalyan