Tuesday, May 31, 2011

Chalte jaana hai (Move on in Life)

Sometimes it is very apparent to move on in life. There may be a lot of reasons that you may want to understand and lot of incidents you may want to forget. Sometimes we do feel that we are actually bonded to something or somewhere, but then we forget the very fact that life is a factor of moving on. I believe, this is the reason why you get to experience lots of bad feelings which actually tell you to move on. Any negative vibe that you get from life is an indication of life telling you that it is time to move on and go somewhere which is a new challenge. Moving on may not be only due to the fact of some bad experience but may also be for the hope of a pleasant future which is being assured or at least lent forward to you.

The poem below of mine is depicting the feeling that one goes through while making a transition or taking the first step towards moving on.



पल पल जो रुकता है
धड़कन कहीं खो गयी है
जागते इतने लम्हों में
यादें कहीं सो गयी है |

भूले बिसरे गीत कुछ
कुछ है पुराने तराने
खाली जामो के बीच है
कई छलकते पय्माने |

उन यादों को छोड़ कर
दूर मैं चला हूँ सबके पार,
पता है की है ये गलत बात
पर अब वफ़ा भी किस्से करूं यार ?

जब डालो पर मेरे फल लहलहाते थे
तब उनकी मिठास कहीं तुमने चखा होगा ...
अब अगर सुखा पड़ा है इस बाग़ में
उम्मीद है मुझे कुछ फल तुमने रखा होगा ......

शिकायत मुझे तुमसे नहीं
इस तंत्र से मुझे गिला है
मुझे इस जगह से हर पल
अनचाहा पल ही मिला है

सोचा मैंने था बहुत
की बहार की होगी बरसात
पर कहीं सोच ही मेरी
खा गयी हकीकत से मात .....

सोची समझी साज़िश कहीं
ज़हन को मेरे डराते हैं ,
उस साज़िश के पीछे मुझे
मेरे ही दोस्त नज़र आते हैं |

कहा मैंने की ना डरूंगा
मैं इन ओछी बातों से ,
अंगारे भले बरसे आज
फूटके चांदनी रातों से .....

फिर सोचा की क्या करूं
जो सामना हुआ अपनों से ,
हकीकत की जंग बेवजह है
टूटे हुए सपनो से |

चाहता हूँ मैं इसीलिए
सारे बंधन जाए टूट ,
जो हुआ अच्छा हुआ अब
रिश्ते भले जाए रूठ |

ज़िंदगी कहते है रुकती नहीं
छोटी मोती बातों से ....
और कहीं होगी यारी अपनी
झिलमिलाती रातों से |

देखा जो मैंने बहते नदी को
तो मैंने सच है जाना ...
हो कितने भी रोक रूकावट
नदी का काम है बहते जाना |

So don't wait for anything and anyone.....Just Move on.....

Monday, May 30, 2011

Yeh sheher se main roothta nahi.. (For Mumbai)

It was 2005 when I came to Mumbai and for the last 6 years I am yet to come to terms with this city. There are so many things in this city, so many problems, so much risk yet I don't know what is there in this city that actually binds everyone like a magnet. This city has just seen inflow of people and never there has been an exodus in any way and when I try to exit from this city there is something that stops me always. The poem below is dedicated to the everlasting spirit of Mumbai (Bombay) and to every one who lives in this wonderful city.



इस शेहेर मी कोई तो बात है
कि मन यहां से उठता नही ...
इस शेहेर जैसा और कोई शेहर
इस मन को जुठ्ता नही ......

सुरज कि पहली किरन
जाब इस शेहेर को जागाती है
हर तरफ से जैसे कोई
अरमान शोर मचाती है

सुन्न सांसो पर जब
लागता है पेहरा सवेरे का
हर तरफ जैसे गुल होता है
राज अंधेरे का
अंधेरे मी भी येह शेहेर मुझसे रूठ्ता नही
क्या है इस शेहेर मे जो मन उठता नही .....

समंदर का शोर भी
लोगो के सैलाब मी दब जाता है
देख कर इस शेहेर के जलवे हजार
शायद सहम कही रब जाता है ...

पर्बत कही तो कही है
लंबे रास्ते का सफर ...
रंगीन हा राते कही तो कही
चीप चीपाते दो पहर
पसीने कि नमी मी सुखा मन फुटता नही
क्या है इस शेहेर मे जो मन उठता नही ....

खडा मै रहा तो देखा मैने हसीन नजारा
गरीबी की सुरत कही तो कही अमिरी का शरारा

कोई शेहेर शायद हि हो जहा पल पल दिल रूकता नही
हा जाना मैने के क्यो मन उठता नही ........

Long live Mumbai.

Sunday, May 29, 2011

Phir bhi mujhe pyaas hai (Still yearning for you..)

The story of love is incomplete without an element of melanchony and lament. Love stories, probably, have the most number of flavors due to the plethora of emotions that can be actually conveyed by means of them. A love story is not a formula, but is a pallette on which an artist can mix many colors and bring out new images thereof from them. People say that in love there is no victory or defeat. However, what I feel that love is never made to achieve anything. It is a function of constant desire Vs the eternal conscience that actually lies beneath. It is both material and divine. It is supernatural and sublime. It is dramatic and practical. The poem below presents an excerpt of such a love story which never ended but probably just stopped.....possibly to start again...with a new lease of life.



दरख्तों पर फूटे फूल पर
ओस के बूंदों का एहसास है ......
मैं आज भी खड़ा हूँ उस पेड़ के निचे
की तेरी मुझे आज भी प्यास है .....

पर कटे कहीं मेरे पर
आसमान नीला फिर भी पुकारे
तुम शायद कहीं दूर हो मगर
ज़हन में अभी भी ख्याल तुम्हारे
दस्तक देते है क्यों यादें ...किसकी उन्हें तलाश है
शायद कहीं न कहीं मुझे अभी भी तेरी प्यास है.

लम्हों को मैं जिया सही पर
वक़्त के रेत को फिसलना था
कहीं होके तुझसे जुदा
इस पत्थर दिल को पिघलना था
मानाने पर भी माना नहीं ..दिल ये मेरा बदमाश है
"चुप रहो" कहूं मैं इसे...पर फिर भी तेरी प्यास है ....

बंजर ज़मीन है और कहीं
सुखा मेरा अम्बर भी है ....
इश्क के तपिश में कहीं
डोला ऐतबार भी है
भरोसा मुझे है कहीं के तू अब भी मेरे पास है
इसीलिए शायद कहीं आज भी तेरी प्यास है .....

ज़ख्मो पर मलहम लगे
तो ज़ख्म भी रो पड़ते है
के मलहम भी कहीं मेरे
ज़क्मो पर मोती जड़ते हैं
उन मोती पर कहीं तेरे अक्स का एहसास है
पास नहीं मेरे तू पर फिर भी मुझे प्यास है ......

Love may stop....a love story may take a pause....but the thirst still remains.

Thursday, May 26, 2011

Tu kitnee khoobsoorat hai (Your are so beautiful!!)

People say that beauty lies in the eyes of the beholder. But what to do when the beholder himself is not aware of what or where the real beauty is lying. The beholder itself is confused about the fact that whether to praise the beauty that he is actually seeing, that is actually visible, conscious or whether to actually drill deep and look for the beauty that lies beneath. Beneath somebody's heart and somebody's soul. The poem is about the quest for beauty, about a person who felt that he knew what beauty was but then alas found out that what actually he was praising, was nothing compared to what he finally missed out to praise.



आँखों ने मेरे कहाँ मुझसे
मेरी नज़रों की ज़रुरत है तू ,
मेरी आँखों से खुदको देख
कितनी खूबसूरत है तू|

बेवजह अपने अक्स को तू
क्यों कोसा करती है ...
साँसों में तेरी इतनी ताजगी
फिर क्यों तू मरती है .....
पल भर में तू शोला है तो कभी शबनम है तू
खूबसूरत सा कोई पैघाम है तू.....

आईना मत देख तू यह तो एक छलावा है
खूबसूरती तेरे दिल में है ...बहार बस दिखावा है ...

रेगिस्तान में जैसे खिला हो फूल बावल पर
लिखा हो जैसे किसीने सहलाई से चावल पर
कभी शक्स है तू ...तो कभी मूरत है तू
मेरी आँखों से देख खूबसूरत है तू.......

होठ तेरे गुलाबी कहते है
कारीगरी है ये अजब कुदरत के
आँखों के इशारे जैसे ....
रह देखाते है मुझे जन्नत के....

नीले लिबाज़ ओढ़े चांदनी रात में तू समंदर सी लगती है ...
देखकर तुझे कुछ अरमान मेरे अन्दर जगती है ...
फिर भी तुझे क्यों नहीं है तेरे हुस्न पर घूमान
खूबसूरत है इतनी तू फिर भी नहीं कोई अभिमान

शायद तेरी येही अदा तुझे बनाती खूबसूरत है
इंसान से शायद येही तुझे बनाती मूरत है

हाय मैं क्या करूं के देख न पाया मैं इस अंदाज़ को ...
तेरी हर ख़ामोशी में सुन न पाया इस सुन्दर आवाज़ को

पता मुझे है की किस्मत मेरी खराब है शायद
के सिर्फ मैंने जो देखा वोह तेरी सूरत है .....
आज जो जाना मैंने बात गहराई से
तो सच .....लगा मुझे ....तू कितनी खूबसूरत है

Tuesday, May 24, 2011

Rab ki Marzee.. (It is God's Will)

Many times you go through a rough patch and many times you have to struggle. Many times there are good moments and sometimes the forgettable bad ones. However, through all these moments one thing is certain that there will be somebody to tell you that whatever happens is God's will. My Poem below explores the same statement of God's will.



किस किस को आज दू दुआएं
किसे आखिर दू मेरे अरमानो की अर्जी
चुप रहना मेरा जहाँ को लगा है बेहतर
शायद येही है रब की मर्जी ......

किस तरह से मैंने साहिल पर
तूफ़ान से कश्ती है मोड़ा
टूटे हुए कुछ रिश्तो को कैसे
मैंने खून से अपने है जोड़ा
फिर भी मेरी कोशिश दुनिया को लगे है फर्जी
हाय ! क्या इसी को कहते है रब की मर्जी !!!

कुछ वादे जो किये थे किसीसे
फूलों की खुशबू में बिखर गए
फूल कहीं जो मुझे मिले नहीं
तो वादे कांटो में ही बिसर गए
सुलगते अरमानो पर मैंने खेली है अंगारों की बाज़ी
मेरी थी जिद ये फिर भी लोग कहें "रब की मर्जी"|

चाहा था मैंने एक छोटा सा आशियाँ
इस ईट पत्थर के शेहेर में अपना छोटा जहाँ
कही लगी बोली मेरे ख़्वाबों की तो कहीं रूठा था क़ाज़ी
कश्ती डूबी तो मल्हा भी बोला "रब की मर्जी"|

ऐ रब मैंने तुम्हे क्या कभी नहीं दी खुशी
क्या आंसुओं ने मेरे तुम्हे न किया सर्द
फिर क्यों देखूं मैं की खुश है सारा जहाँ
और मैं किसी कोने में झेल रहा हूँ दर्द ?
जब आता हूँ लेके शिकायत तेरे दर पर मैं
तो तेरा ही कोई बंदा करता है अल्फाज़ी
"जो हुआ अच्छा हुआ....यहीं है रब की मर्जी!"

God's Will .....what to say.

Monday, May 23, 2011

Saans Abhi Baaki hai (I am still alive)

Sometimes it is very remarkable as to how a person just comes out from nowhere and stays alive. This poem of mine talks about life and survival.



सहमे सहमे ख्वाबो में,
कुछ आस अभी बाकी है,
ख़त्म ज़िंदगी है सही
पर सांस अभी बाकी है |

पल पल मरते अरमानो में
कुछ सपनो की झलक है शायद,
यह कुछ गलतियां है जिन पर मेरा
अफ़सोस अभी बाकी है |
पिया मैंने बहुत तुझे पर प्यास अभी बाकी है
कहती है मौत भी मुझे की सांस अभी बाकी है ......

दम तोड़ते हैं कुछ एहसास
कुछ पल जैसे मिटते है हर पल
तुझसे लड़ा था कभी मैं
पर खटास अभी बाकी है |
तुझसे लड़ने के बाद तेरी फिरसे तलाश अभी बाकी है
तुझसे मिलना है ...रंज ही सही... सांस अभी बाकी है |

लोग मुझे देते है ताने
उंगली उठती है मुझपे हर तरफ,
उन इल्जामो में कुछ धुला हूँ मैं
दर्द का फाँस अभी बाकी है |
जानता मैं हूँ की सूखे पेड़ पर फूटने पलाश अभी बाकी है
इसी उम्मीद पर शायद सांस अभी बाकी है .............

Never give up hope.