
इस शेहेर मी कोई तो बात है
कि मन यहां से उठता नही ...
इस शेहेर जैसा और कोई शेहर
इस मन को जुठ्ता नही ......
सुरज कि पहली किरन
जाब इस शेहेर को जागाती है
हर तरफ से जैसे कोई
अरमान शोर मचाती है
सुन्न सांसो पर जब
लागता है पेहरा सवेरे का
हर तरफ जैसे गुल होता है
राज अंधेरे का
अंधेरे मी भी येह शेहेर मुझसे रूठ्ता नही
क्या है इस शेहेर मे जो मन उठता नही .....
समंदर का शोर भी
लोगो के सैलाब मी दब जाता है
देख कर इस शेहेर के जलवे हजार
शायद सहम कही रब जाता है ...
पर्बत कही तो कही है
लंबे रास्ते का सफर ...
रंगीन हा राते कही तो कही
चीप चीपाते दो पहर
पसीने कि नमी मी सुखा मन फुटता नही
क्या है इस शेहेर मे जो मन उठता नही ....
खडा मै रहा तो देखा मैने हसीन नजारा
गरीबी की सुरत कही तो कही अमिरी का शरारा
कोई शेहेर शायद हि हो जहा पल पल दिल रूकता नही
हा जाना मैने के क्यो मन उठता नही ........
Long live Mumbai.
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