
दरख्तों पर फूटे फूल पर
ओस के बूंदों का एहसास है ......
मैं आज भी खड़ा हूँ उस पेड़ के निचे
की तेरी मुझे आज भी प्यास है .....
पर कटे कहीं मेरे पर
आसमान नीला फिर भी पुकारे
तुम शायद कहीं दूर हो मगर
ज़हन में अभी भी ख्याल तुम्हारे
दस्तक देते है क्यों यादें ...किसकी उन्हें तलाश है
शायद कहीं न कहीं मुझे अभी भी तेरी प्यास है.
लम्हों को मैं जिया सही पर
वक़्त के रेत को फिसलना था
कहीं होके तुझसे जुदा
इस पत्थर दिल को पिघलना था
मानाने पर भी माना नहीं ..दिल ये मेरा बदमाश है
"चुप रहो" कहूं मैं इसे...पर फिर भी तेरी प्यास है ....
बंजर ज़मीन है और कहीं
सुखा मेरा अम्बर भी है ....
इश्क के तपिश में कहीं
डोला ऐतबार भी है
भरोसा मुझे है कहीं के तू अब भी मेरे पास है
इसीलिए शायद कहीं आज भी तेरी प्यास है .....
ज़ख्मो पर मलहम लगे
तो ज़ख्म भी रो पड़ते है
के मलहम भी कहीं मेरे
ज़क्मो पर मोती जड़ते हैं
उन मोती पर कहीं तेरे अक्स का एहसास है
पास नहीं मेरे तू पर फिर भी मुझे प्यास है ......
Love may stop....a love story may take a pause....but the thirst still remains.
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