
संभल के जब तुम करती हो मुझसे यूँ
इधर उधर की कुछ बातें,
बेशरम सी ये हावाएं गुदगुदाती है मुझे,
रोशन होती हैं मेरी काली रातें |
अजनबी से कुछ ख्याल कभी जो
आते हैं मेरे ज़हन के करीब,
तुम्हारी यादें ही तो हैं कुछ धुंधली सी,
जो लिखती हैं मेरा नसीब |
ज़िंदगी सोचता हूँ के बीत जायेगी मेरी,
गर तुम न भी हो मेरे साथ,
पर शायद कहीं आज भी एहसास हैं उस पल का,
जब हाथों में था मेरे तुम्हारा हाथ |
न जाने आज भी क्यों मुझे लगता हैं
तुम हो कहीं न कहीं मेरे दिल में ,
आज भी मैं कहीं कुछ वीरान सा हूँ
इस ज़िन्दगी के भरी महफ़िल में |
न वक़्त का मुझे अब रहा कुछ लिहाज़,
न रहा मुझे ज़माने का कुछ डर,
तुम आज जो न हो मेरे साथ तो अब
बस कट रही है यूँ ही मेरी उमर |
अरसा जैसे बीत गया हैं
खामोश सी एक दीवार है जैसे
मेरे तेरे बीच यह दूरियों से,
वक़्त भी शर्मसार है जैसे,
कभी बरसता था जिस बादल से पानी,
आज कहीं वोह जर्जार है
मैं समझता था जिसको एक नज़र का छलावा
आज मुझे लगता है शय वोही पयार हैं |
बातें आज मेरे कानो को असर करती नहीं,
क्योंकि तेरी आहट मुझे सुनाई देती है हर दम,
सावन तो मेरे मुल्क में कई आये और गए,
पर ज़िन्दगी में मेरे अभी भी हैं पतझड़ का मौसम |
तुम मुझसे खफा हो पर मुझे क्यों तुम्हारा इंतज़ार हैं,
बे-ईमान मेरा यह दिल कह रहा हैं की शायद
येही प्यार हैं |
रात का अँधेरा जो कभी चुप के से समाता हैं,
तुम्हारे साथ बीते वोह एक छोटा सा पल
मुझे याद आता हैं |
खुद को में तेरा आशिक कह कर,
आज ज़िक्र तेरा क्यों सरे-आम करूँ ,
ज़िन्दगी मेरी और तेरी आगे बहुत बाकी है,
तो मौत का क्यों इंतज़ाम करूँ |
वोह इश्क का जूनून हैं जो कभी
मुझे तुझसे बार बार मिलाता हैं,
कुछ उन्स ऐसा हुआ है
जो पतझड़ में फूल खिलाता हैं |
ज़माना शायद मुझे बक्श न दे,
हूँ मैं इस सज़ा के लिए भी तैयार;
तब सोचता हूँ मेरे हमनशीं
की शायद यह ताक़त ही हैं मेरा प्यार |
बिछड़ने न मुझे तुझसे कोई खास ग़म नहीं हैं,
पर यह दिल क्यों कह रहा है की जुदाई का मौसम नहीं हैं|
मुझे मालूम हैं की आज भी हैं उन होठों पर एक इनकार,
पर शायद दिल कह रहा है की तुझे आज भी हैं मुझसे प्यार |
Don't let that feeling go away!!!!!
Love
Kalyan
No comments:
Post a Comment