The poem below of mine is depicting the feeling that one goes through while making a transition or taking the first step towards moving on.
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पल पल जो रुकता है
धड़कन कहीं खो गयी है
जागते इतने लम्हों में
यादें कहीं सो गयी है |
भूले बिसरे गीत कुछ
कुछ है पुराने तराने
खाली जामो के बीच है
कई छलकते पय्माने |
उन यादों को छोड़ कर
दूर मैं चला हूँ सबके पार,
पता है की है ये गलत बात
पर अब वफ़ा भी किस्से करूं यार ?
जब डालो पर मेरे फल लहलहाते थे
तब उनकी मिठास कहीं तुमने चखा होगा ...
अब अगर सुखा पड़ा है इस बाग़ में
उम्मीद है मुझे कुछ फल तुमने रखा होगा ......
शिकायत मुझे तुमसे नहीं
इस तंत्र से मुझे गिला है
मुझे इस जगह से हर पल
अनचाहा पल ही मिला है
सोचा मैंने था बहुत
की बहार की होगी बरसात
पर कहीं सोच ही मेरी
खा गयी हकीकत से मात .....
सोची समझी साज़िश कहीं
ज़हन को मेरे डराते हैं ,
उस साज़िश के पीछे मुझे
मेरे ही दोस्त नज़र आते हैं |
कहा मैंने की ना डरूंगा
मैं इन ओछी बातों से ,
अंगारे भले बरसे आज
फूटके चांदनी रातों से .....
फिर सोचा की क्या करूं
जो सामना हुआ अपनों से ,
हकीकत की जंग बेवजह है
टूटे हुए सपनो से |
चाहता हूँ मैं इसीलिए
सारे बंधन जाए टूट ,
जो हुआ अच्छा हुआ अब
रिश्ते भले जाए रूठ |
ज़िंदगी कहते है रुकती नहीं
छोटी मोती बातों से ....
और कहीं होगी यारी अपनी
झिलमिलाती रातों से |
देखा जो मैंने बहते नदी को
तो मैंने सच है जाना ...
हो कितने भी रोक रूकावट
नदी का काम है बहते जाना |
So don't wait for anything and anyone.....Just Move on.....