Saturday, June 11, 2011

Badsoorat pyaar ( The ugly face of love)

As I wrote in the poem before that love may be beautiful or ugly, this poem is actually showing the ugly face of love. As there come deciet in relationships, they just fall appart. Deciet is not like a storm, rather it is like a termite, which actually eats you up from inside. A storm can be handled. One can actually duck down or seek shelter during storm but then when it is a "termite problem", it becomes rather diffucult to actually identify it in the first step and when the problem is revealed it is too late for anybody to respond or address it.
Deciet gives love that ugly face, that it sometimes deserves. If all love stories were rosy-dovy then there would not be any kind of uncertainity in any relationships, but then GOD makes the world a balanced place. So where there is the evolvement of love there also can be an element of deciet.




एक सफ़र जो कहीं हुआ
शुरू आज अधुरा है ...
के आज प्यार के इम्तेहान में
धोखे का मौका पूरा है ......

कहीं कहीं चर्चा आम हैं
इस दिल के टूटने का
तो फिर कहीं है एक शिकायत
एतबार के लुटने का ..

जब कहा था तुने के
प्यार तुझे है हर पल
तो शायद तेरे दिल से
झूठा इकरार हुआ था...
जब कहा था तुने के
तू भी रहा है जल
शायद वहेम मुझे हुआ
के तुम्हे प्यार हुआ था .......

प्यार की तेरी बदसूरती
मुझे कर गयी झंजोड़
कितनी आसानी से तुने
मेरे दिल को दिया तोड़ ..

इंतज़ार जो मैंने किया
क्या उस इंतज़ार का नहीं मोल
चाहता हु मैं की मैं राहू चुप
अब तू ही मुझे कुछ बोल ....

पल भर भी मैंने जिसे
आँखों से न किया ओझल
उस शक्स ने ही दिया
धोखा मुझे हर पल

गर प्यार है येही तो
प्यार की मुझे दरकार नहीं
की और भी हा ग़म मोहब्बत के सिवा
मैं प्यार के लिए बेक़रार नहीं ....

सारे जो बंधन तोड़े मैंने
वोह टूटे बंधन आज उड़ाते मज़ाक है
आग प्यार की लगी थी जो
धोखे की हवा अब उड़ाते राख है .....

सुरीली वोह बातें तुम्हारी
चुभती है आज इस दिल को मेरे
बांध करो कोई वो सारे तराने
गूंजते है आज भी जो महफ़िल में मेरे

आग लगाते प्यार को आज
आग लगे तो बेहतर है ....
की दिल जले किसीका तो बात क्या
ये मोहब्बत जले तो बेहतर है ....

काली शक्ल प्यार की ये
दिल को मेरे डराती है
की अँधेरा हर जगह है जो
अँधेरा वोह कराहती है

प्यार जो बनी गाली
उस प्यार को मैं भूल गया
प्यार को मैंने खुद लटकाया
और अपने आप में झूल गया

इस मोहब्बत का राक्षस आज
खाने मुझे आता है
मारा इसको तोडके तुझसे रिश्ता
अब अकेलापन की भाता है ....

परवाह मुझे अब ये नहीं
ज़माना मुझे क्या कहता है
की अब प्यार मुझे नहीं है और
नफरत लहू में बहता है ......

फाड़ा मैंने सारे ख़त वोह
जो तुने मुझे लिखे थे
रस्ते में मैं जाता नहीं
जिस रस्ते में तुम दिखे थे ....

नजराने प्यार के जला दिए
जब भरोसा तुमसे उठ गया
ज़िंदगी अभी भी चल रही है
क्या हुआ जो यार रूठ गया

समझना मत के प्यार की आग
मुझे भी जलाके बुझ जायेगी
की इतनी आग तो मुझमे भी है
दुनिया भी इसमें समा जायेगी

कहा था मैंने की सफ़र मेरा अधूरा है
पर लगता है अब मुझे की तेरे बिना ही सफ़र पूरा है

Not all things end on a happy-note. Love may also come with its ugly side. So never be blind in love.

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