Tuesday, January 10, 2012

कागज़ के फूल .....प्यार के (Paper Roses of Love)

Love sometimes takes a toll on your life. As they say, love may be a requirement but is not the food for life....Albeit an irritation towards love may not mean that you actually hate a person, however it means that the time has come when you require a break from love. Too much of sugar can make a dish very nauseatic and very inappropriate for consumption. So while somebody is in love, which is a very good thing, there should be moment when he/she should take a break from the process of loving. Most of the times what makes love go sour is the repetitive process of meeting and sharing thoughts. Love should be accompanied with silence.

Thus, sometimes roses of love become like that of made from paper, which have the facade but not the content.

साँसों के आने जाने पर किसीने रोक लगा दिया
तुम्हारे आहतो ने क्यों जीने पे रोक लता दिया ?

बेवक्त मुझे तुमने हर वक़्त किया परेशान
मेरे दिल के तुम बने हुए हो बिन बुलाये मेहमान ....

न चाहते हुए भी मुझे तुम्हे क्यों पड़ा चाहना
रोनी सी सूरत में भी क्यों हालात पे पड़ा हसना ?

परेशान करते हमेशा मुझे तुम्हारे लाजवाब सवाल
बेफिजूल मचा है क्यों मेरी ज़िंदगी में बवाल ?

संभालते किसको आखिर हम दिल तो हमने खो दिया,
आग की लटो में तुम्हारी हमने ज़िंदगी पिरो दिया ....

उस ज़िंदगी को मैं फिर से कहीं जीना चाहता हूँ ...
पूरा महखाना नहीं पर मह के कुछ पैमाने पीना चाहता हूँ .

पल भर के लिए ही सही पर तुम्हे चाहता हूँ मैं भूल
कब तक बहलाऊंगा दिल को देख प्यार के कागजी फूल ....

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