My Hindi poem below actualy depicts the arrival of "Sharad" aur autumn that is actually arriving after the wet days of monsoon in India. Just like a smile comes on the face of a beautiful girl after hours of shedding tears.
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मौसम के मिजाज़ ने
ली हैं करवट ऐसे
पल भर में बदला है
कुदरत का बनावट जैसे
बारिश की बूंदे हुई है ओझल आँखों से
शरद आया जहाँ में पारिजात के पंखो से
कहीं नवरात्र के सुर है तो कहीं है
माँ दुर्गा के जोश भरे ढ़ाक
कहीं हैं जगरातो की धूम आज तो
कहीं रंग बिरंगे पोशाक ......
किस देश में होगा ऐसा
सोच कर मैं हूँ हैरान ....
जहा मौसम को भी हैं
संस्कृति का अभिमान ....
साँसे जो लेते है उसमे भी
अलग से है एहसास आज
बरसात के आंसू के बाद जैसे
बजे ख़ुशी के साज़ आज ....
गर्मी के बाद जो रोया आसमान
आज उस आंसुओं का मिला हिसाब
पारिजात के पंखो से हो रहा आज
खुशिओं का धीमा रिसाब ......
काले बादल छट गए और
सूरज जैसे मुस्कुराता हैं ....
गर्मी - बरसात के जंग के बाद
ख़ुशी के वोह गीत गाता है
किस देश में दिखेगा तुम्हे
कुदरत का यह खेल अजीब?
भारत में जो रहते हैं ये बस
उन्ही का है नसीब ......
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