Friday, October 7, 2011

"Sharad" ........ Autumn Moods

There are places where the moods and nature of the people change with the change of season. Their attitudes take swings as the weather takes a turn...But it is only in India that the weather and the seasons oblige to the changes that happen in the populations' moods. Over here, in this land, the seasons oblige to the wishes of the people. Even today, after so many invasions that this country has had, political, cultural and economical, there has been one thing that has bound the fabric of this country...rock solid...and that is the faith of the people towards these, not so logical (in the terms of the West) , but very effective, festivals.

My Hindi poem below actualy depicts the arrival of "Sharad" aur autumn that is actually arriving after the wet days of monsoon in India. Just like a smile comes on the face of a beautiful girl after hours of shedding tears.






मौसम के मिजाज़ ने
ली हैं करवट ऐसे
पल भर में बदला है
कुदरत का बनावट जैसे

बारिश की बूंदे हुई है ओझल आँखों से
शरद आया जहाँ में पारिजात के पंखो से

कहीं नवरात्र के सुर है तो कहीं है
माँ दुर्गा के जोश भरे ढ़ाक
कहीं हैं जगरातो की धूम आज तो
कहीं रंग बिरंगे पोशाक ......

किस देश में होगा ऐसा
सोच कर मैं हूँ हैरान ....
जहा मौसम को भी हैं
संस्कृति का अभिमान ....

साँसे जो लेते है उसमे भी
अलग से है एहसास आज
बरसात के आंसू के बाद जैसे
बजे ख़ुशी के साज़ आज ....

गर्मी के बाद जो रोया आसमान
आज उस आंसुओं का मिला हिसाब
पारिजात के पंखो से हो रहा आज
खुशिओं का धीमा रिसाब ......

काले बादल छट गए और
सूरज जैसे मुस्कुराता हैं ....
गर्मी - बरसात के जंग के बाद
ख़ुशी के वोह गीत गाता है

किस देश में दिखेगा तुम्हे
कुदरत का यह खेल अजीब?
भारत में जो रहते हैं ये बस
उन्ही का है नसीब ......

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